


@ इस संबंध में राजभवन की ओर से 11 सितंबर 2026 को प्राप्त पत्र में कहा गया है कि उठाए गए बिंदुओं का संबंधित स्तर पर परीक्षण कर प्रचलित नियमों एवं प्रावधानों के अनुरूप समुचित कार्रवाई की जाएगी।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सुंदरवती महिला महाविद्यालय, भागलपुर के बीएड विभाग को राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहित करने और पूरे बिहार में बीएड पाठ्यक्रम के लिए एक समान एवं छात्रहितैषी शुल्क नीति लागू करने की मांग को लेकर सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा उठाए गए मामले पर राजभवन ने संज्ञान लिया है।
भागलपुर एवं आसपास के आठ जिलों – भागलपुर, बांका, मुंगेर, लखीसराय, जमुई, शेखपुरा, बेगूसराय एवं खगड़िया की छात्राओं के लिए सुंदरवती महिला महाविद्यालय एक प्रमुख अंगीभूत महिला महाविद्यालय है। महाविद्यालय का बीएड विभाग स्व-वित्तपोषित होने के कारण छात्राओं से करीब 1.50 लाख रुपये शुल्क लिए जाने की बात कही गई है।
इस शुल्क को लेकर छात्रहित में सवाल उठाया गया है। इसके लिए पटना विश्वविद्यालय के वूमेन्स ट्रेनिंग कॉलेज में बीएड की फीस का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के लिए शुल्क करीब 24 हजार रुपये, जबकि एससी/एसटी एवं दिव्यांग छात्राओं के लिए करीब 9 हजार रुपये है। शुल्क में इस अंतर के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की योग्य छात्राओं के लिए बीएड की पढ़ाई करना कठिन होने का दावा किया गया है।

22 अगस्त को राज्यपाल को भेजा था पत्र:
इसी मुद्दे को लेकर 22 अगस्त 2026 को बिहार के राज्यपाल को पत्र भेजकर सुंदरवती महिला महाविद्यालय के बीएड विभाग का राज्य सरकार द्वारा अधिग्रहण करने की मांग की गई थी। साथ ही पूरे बिहार में बीएड पाठ्यक्रम के लिए समान और छात्रहितैषी शुल्क नीति लागू करने का आग्रह किया गया था। इस संबंध में राजभवन की ओर से 11 सितंबर 2026 को प्राप्त पत्र में कहा गया है कि उठाए गए बिंदुओं का संबंधित स्तर पर परीक्षण कर प्रचलित नियमों एवं प्रावधानों के अनुरूप समुचित कार्रवाई की जाएगी।
आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं के लिए राहत की उम्मीद:
मामला खास तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, पिछड़े वर्ग, एससी/एसटी और दिव्यांग छात्राओं के लिए बीएड शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने से जुड़ा है। मांग करने वाले पक्ष का कहना है कि शुल्क अधिक होने के कारण योग्य छात्राओं को शिक्षक बनने की दिशा में आगे बढ़ने में आर्थिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
राजभवन से मिले जवाब के बाद अब संबंधित विभाग एवं विश्वविद्यालय स्तर पर मामले के परीक्षण की उम्मीद है। मांग है कि बीएड शिक्षा की फीस को लेकर ऐसी नीति बनाई जाए, जिससे आर्थिक स्थिति छात्राओं की उच्च शिक्षा में बाधा न बने।

















