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जिलास्तरीय कार्यशाला में कृषि की नई तकनीकों, जैविक खेती और बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन पर जोर; 22 अक्टूबर से पंचायतों में कृषि जनकल्याण चौपाल

भागलपुर। वासंतिक (रबी) महाभियान-2026 के तहत भागलपुर में जिलास्तरीय कार्यशाला, प्रशिक्षण कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष-2026 एवं महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त निदेशक (शस्य) श्याम बिहारी सिंह, उप विकास आयुक्त रवि राकेश, डीआरडीए के निदेशक (लेखा) दुर्गा शंकर प्रसाद, निदेशक (एनईपी) अमर कुमार मिश्र, एसडीसी सोनाली शरण और जिला कृषि पदाधिकारी प्रेम शंकर प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रसार कर्मियों और किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला में रबी मौसम की तैयारियों, किसानों तक कृषि योजनाओं का लाभ पहुंचाने, आधुनिक तकनीकों को अपनाने, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा महिला किसानों की भूमिका को सशक्त बनाने पर चर्चा की गई।

चार महिला किसानों को मिला प्रगतिशील महिला किसान सम्मान

महिला किसान दिवस के अवसर पर कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिला किसानों ने अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। इसमें मशरूम उत्पाद, वर्मी कम्पोस्ट, कतरनी चूड़ा और चावल के स्टॉल शामिल थे। इन स्टॉलों के माध्यम से महिला किसानों के उद्यम और कृषि आधारित गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर जगदीशपुर की संगीता देवी, सबौर की स्वर्ण संध्या भारती, पीरपैंती की रेखा रानी और कहलगांव की शीला कुमारी को उप विकास आयुक्त रवि राकेश ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर प्रगतिशील महिला किसान सम्मान से सम्मानित किया।

कार्यक्रम में महिला किसानों की भागीदारी को कृषि विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। कृषि उत्पादन के साथ-साथ मशरूम, जैविक खाद और स्थानीय कृषि उत्पादों से जुड़े उद्यमों को आय बढ़ाने का माध्यम बताया गया।

22 अक्टूबर से पंचायतों में शुरू होगा कृषि जनकल्याण चौपाल अभियान

कार्यक्रम में बताया गया कि भागलपुर जिले की सभी पंचायतों में 22 अक्टूबर 2026 से वासंतिक (रबी) कृषि जनकल्याण चौपाल-सह-खेत बचाओ अभियान आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से किसानों को कृषि संबंधी योजनाओं, खेती की तकनीकों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा 23 से 31 अक्टूबर 2026 तक जिले के सभी प्रखंडों के कृषि कार्यालयों में प्रखंडस्तरीय प्रशिक्षण-सह-उपादान वितरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के जरिए किसानों को रबी फसलों की तैयारी और कृषि विभाग की योजनाओं से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।

बाजार की मांग के अनुसार फसल चयन करें किसान : उप विकास आयुक्त

उप विकास आयुक्त रवि राकेश ने किसानों और कृषि प्रसार कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है और देश की सभ्यता के विकास में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव के बिना उद्योगों के विकास की मजबूत नींव तैयार करना कठिन है।

उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ बाजार की मांग के अनुरूप फसलों का चयन करने की सलाह दी। केला, मक्का, मखाना और स्वीट कॉर्न जैसी फसलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को उत्पादन के साथ बाजार की जरूरतों पर भी ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने खेती में जैविक और प्राकृतिक खादों के उचित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि कृषि पद्धतियों में बदलाव के माध्यम से खेती को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।

बिहार कृषि ऐप डाउनलोड कराने का निर्देश

संयुक्त निदेशक (शस्य) श्याम बिहारी सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कृषि प्रत्यक्षण कार्यक्रमों के लिए आवश्यक सामग्री और उपादानों की सूची तैयार की जाए। उन्होंने एक प्रखंड या सहायक तकनीकी प्रबंधक को नोडल अधिकारी बनाने की बात कही, जो प्रत्यक्षण से संबंधित आवश्यक सामग्री की उपलब्धता, वितरण और कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।

उन्होंने बताया कि प्रत्यक्षण के लिए फसल के अनुसार बीज, जैविक खाद और जैव उर्वरक जैसी सामग्री शामिल की जा सकती है। साथ ही, किसान सलाहकारों और कृषि समन्वयकों को अधिक से अधिक किसानों के मोबाइल फोन में बिहार कृषि ऐप डाउनलोड कराने का निर्देश दिया, ताकि किसान कृषि विभाग की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें।

प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी और पर्यावरण बचाने की अपील

जिला कृषि पदाधिकारी प्रेम शंकर प्रसाद ने कहा कि खेत-खलिहान किसानों की पहचान और देश की कृषि विरासत हैं। इस विरासत को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसानों की खुशहाली और कृषि क्षेत्र में हरियाली लाने के लिए विभागीय अधिकारियों एवं कर्मियों को समन्वित प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि किसान अपनी कुल कृषि भूमि के एक चौथाई हिस्से में जैविक खेती करने का प्रयास करें। उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी, पानी और हवा पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की ओर ध्यान दिलाया।

उन्होंने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों का उचित उपयोग करने और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, स्वस्थ मिट्टी और स्वच्छ पर्यावरण कृषि के दीर्घकालीन विकास के लिए आवश्यक हैं।

कृषि वैज्ञानिकों ने दी तकनीकी जानकारी

कार्यशाला में कृषि विज्ञान केंद्र, सबौर की वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिता कुमारी तथा बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर की कनीय वैज्ञानिक डॉ. स्नेहा शीखा और डॉ. गायत्री कुमारी ने किसानों एवं विभागीय पदाधिकारियों को तकनीकी जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने कृषि से संबंधित विषयों पर मार्गदर्शन दिया, ताकि किसान खेती की बेहतर पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार कर सकें।

कार्यक्रम में उप परियोजना निदेशक, आत्मा प्रभात कुमार सिंह, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी रामजीवन सिंह, नवगछिया के अनुमंडल कृषि पदाधिकारी वरुण कुमार, कहलगांव की अनुमंडल कृषि पदाधिकारी डॉ. हेमलता कुमारी, नाबार्ड की जिला विकास प्रबंधक अर्चना प्रिया, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. अंजली कुमारी सिन्हा और जिला मत्स्य पदाधिकारी प्रसुन कुमार प्रभात सहित कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रभात कुमार सिंह ने अधिकारियों, कर्मियों और किसानों का स्वागत किया। अंत में उन्होंने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला के समापन की घोषणा की।

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