
@ भागलपुर के खरीक में भी लगेगा 2.4 मेगावाट का प्लांट; रूफटॉप सोलर लगाने में जिले का बिहार में चौथा स्थान।
भागलपुर। अब सूरज की रोशनी सिर्फ खेतों और घरों को रोशन नहीं करेगी, बल्कि बिजली उत्पादन में भी भागलपुर और बांका की तस्वीर बदलने जा रही है। एक ओर बांका जिले में 85 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट संचालित हो रहे हैं, तो दूसरी ओर भागलपुर भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी में है। खरीक में पांच करोड़ रुपये की लागत से 2.4 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इसके अलावा जिले में सात से आठ अन्य सौर ऊर्जा परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं।

खास बात यह है कि बड़े सोलर प्लांट के मामले में भागलपुर भले ही बांका से पीछे हो, लेकिन घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के मामले में यह बिहार में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है। यानी बड़े बिजलीघरों से लेकर आम लोगों के घरों तक, सौर ऊर्जा अब इस क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में बदलाव का नया आधार बन रही है।
भागलपुर जिले के खरीक में प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) की सी योजना के तहत सोलर प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना पर एक निजी कंपनी करीब पांच करोड़ रुपये खर्च कर रही है। प्लांट में सोलर पैनल लगाने का काम शुरू हो चुका है।इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से लगभग 1.05 करोड़ रुपये और बिहार सरकार की ओर से 45 लाख रुपये का अनुदान मिलने का प्रावधान है। इस तरह कुल डेढ़ करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान है।परियोजना के तहत उत्पादित बिजली को सरकार द्वारा तीन रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदने की योजना है। इससे सौर ऊर्जा उत्पादन के साथ निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
खरीक में स्थापित हो रही सौर ऊर्जा इकाई की क्षमता 2400 किलोवाट यानी 2.4 मेगावाट है। उत्पादन के निर्धारित मानक के अनुसार, प्रति किलोवाट प्रतिमाह 120 यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान लगाया गया है। इस हिसाब से प्लांट से हर महीने लगभग 2.88 लाख यूनिट बिजली पैदा हो सकती है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन धूप की उपलब्धता, मौसम और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
जिले में सात से आठ अन्य सौर ऊर्जा इकाइयां भी प्रस्तावित हैं। यदि ये परियोजनाएं धरातल पर उतरती हैं, तो भागलपुर की बिजली व्यवस्था को वैकल्पिक ऊर्जा का एक मजबूत सहारा मिल सकता है।
सौर ऊर्जा के बड़े प्रोजेक्ट के मामले में पड़ोसी जिला बांका फिलहाल आगे है। यहां चार सोलर प्लांट संचालित हैं, जिनकी कुल स्थापित क्षमता 85 मेगावाट बताई गई है। इनमें शंभुगंज में सूर्यांता प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड की पांच मेगावाट क्षमता वाली इकाई, ककवारा में एकमी कंपनी का 25 मेगावाट का प्लांट, कटोरिया में अवदा कंपनी की 50 मेगावाट क्षमता वाली इकाई और बौंसी में उदिता कंपनी का पांच मेगावाट का प्लांट शामिल है। इन चारों परियोजनाओं की कुल क्षमता 85 मेगावाट है। बांका के पहाड़ी और कम आबादी वाले इलाकों में बड़े भूखंड उपलब्ध होने से सोलर प्लांट स्थापित करना अपेक्षाकृत आसान रहा है।
इसके उलट, भागलपुर में जमीन की अधिक कीमत और बड़े भूखंडों की उपलब्धता की चुनौती के कारण बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थापित करना आसान नहीं है। इसके बावजूद जिले में नई परियोजनाओं की तैयारी जारी है।
विद्युत आपूर्ति क्षेत्र, भागलपुर के उप महाप्रबंधक सह विद्युत अधीक्षण अभियंता इंजीनियर संजय कुमार बरियो के अनुसार, बांका में स्थानीय स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू होने से लो वोल्टेज और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की पुरानी समस्या लगभग समाप्त हो चुकी है।
बड़े सोलर प्लांट के मामले में भागलपुर अभी विस्तार के दौर में है, लेकिन घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा अपनाने में जिले ने उल्लेखनीय स्थान बनाया है।उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भागलपुर जिले में अब तक 1470 घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ जिला बिहार में चौथे स्थान पर है।
















