
@ पिंक लोटस पब्लिकेशन हाउस प्रकाशित करेगा पुस्तक का द्वितीय संस्करण। विक्रमशिला महाविहार के पूर्ण अन्वेषक डॉ एलके मिश्र आज भी गुमनामी के अंधेरे में। ‘द डायनामिक्स ऑफ रामायण’ का प्रथम संस्करण स्कॉटलैंड के मुख्य लाइब्रेरी में सुरक्षित है।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। इतिहासविद् डॉ. लक्ष्मी कांत मिश्र की ऐतिहासिक कृति ‘द डायनामिक्स ऑफ रामायण’ का द्वितीय संस्करण 12 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित किए जाने की घोषणा की गई है। पुस्तक का पहला संस्करण वर्ष 1966 में प्रकाशित हुआ था। लगभग छह दशक बाद इसके पुनर्प्रकाशन को परिवार ने अपनी ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। पुस्तक का प्रकाशन पिंक लोटस पब्लिकेशन हाउस द्वारा किया जा रहा है।

डॉ लक्ष्मीकांत मिश्र के पौत्र विष्णुकांत मिश्र कहते हैं कि परिवार के लिए यह अवसर इसलिए भी खास है, क्योंकि इसी दिन मेरे पुत्र सत्यम कश्यप का जन्मदिवस भी है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के इस अवसर को परिवार ने जन्मदिवस की खुशी और पूर्वज की साहित्यिक विरासत के पुनर्प्रकाशन के रूप में यादगार बताया है।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेषों की खोज में अहम योगदान का दावा:
डॉ. लक्ष्मी कांत मिश्र भागलपुर जिले के कहलगांव क्षेत्र स्थित कासडी गांव के निवासी थे। परिवार के अनुसार, वे स्वतंत्र शोधकर्ता और इतिहासविद् थे, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद ऐतिहासिक अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया।परिवार का दावा है कि विलुप्त हो चुके प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के अवशेषों को खोजने और दुनिया के सामने लाने में डॉ. मिश्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके योगदान को उचित पहचान दिलाने के लिए परिवार ने क्षेत्र में उनके नाम पर स्मारक, संग्रहालय या प्रतिमा स्थापित किए जाने की आवश्यकता भी जताई है।गांव के लोग उन्हें ‘टोपी वाले बाबू’ कहकर पुकारते थे। उनकी पहचान की सबसे खास विशेषताओं में से एक थी – वे नियमित रूप से घोड़े की सवारी करते थे और अंग्रेज़ी शैली की टोपी पहनते थे। ग्रामीण उन्हें लक्खी बाबू के नाम से भी पुकारते थे।

पैतृक घर में सुरक्षित हैं ऐतिहासिक दस्तावेज:
परिवार के मुताबिक, डॉ. मिश्र का पैतृक घर आज भी कासडी गांव में मौजूद है, जो कासडी काली मंदिर के निकट स्थित है। यहां उनके ऐतिहासिक दस्तावेजों और तस्वीरों को सुरक्षित रखा गया है। इन धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी उनके पौत्र बिष्णु कांत मिश्र निभा रहे हैं। परिवार का मानना है कि इन दस्तावेजों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को डॉ. मिश्र के शोध और ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बताया गया कि उनकी ‘द डायनामिक्स ऑफ रामायण’ का प्रथम संस्करण स्कॉटलैंड के मुख्य लाइब्रेरी में सुरक्षित है। इस आशय की जानकारी ई मेल के जरिए लाइब्रेरी के प्रमुख ने डॉ मिश्र के परपोता सत्यम को दी है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होगी पुस्तक:
पुस्तक के द्वितीय संस्करण का प्रकाशन डॉ. मिश्र की कृति को नई पीढ़ी के पाठकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। परिवार ने इस प्रयास के लिए पिंक लोटस पब्लिकेशन हाउस के प्रति आभार व्यक्त किया है। परिवार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, ‘द डायनामिक्स ऑफ रामायण’ को अमेजन, फ्लिपकार्ट सहित विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उपलब्ध कराने की योजना है।
परिवार के लिए यह पुनर्प्रकाशन महज एक पुस्तक का नया संस्करण नहीं, बल्कि अपने पूर्वज के बौद्धिक योगदान और ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। इस पहल के माध्यम से डॉ. लक्ष्मी कांत मिश्र के जीवन, शोध और कार्यों को व्यापक पहचान दिलाने की उम्मीद जताई गई है।















