
सैकड़ों वर्षों से जुड़ी है मंदिर की आस्था और परंपरा, वर्ष 1968 में रखी गई थी मंदिर की नींव; नवरात्र में अष्टमी, नवमी और दशमी पर लगता है भव्य मेला, सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क
भागलपुर। जिले के जगदीशपुर प्रखंड अंतर्गत बैजानी गांव स्थित 18 भुजाओं वाली वैष्णवी मां दुर्गा का रणचंडिका मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के अवसर पर मां के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। चारों ओर फैली हरियाली के बीच स्थित मंदिर का मनोरम दृश्य भक्तों को आकर्षित करता है। बैजानी सहित आसपास के गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां के दरबार में माथा टेक रहे हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से लगातार विकसित हुए इस मंदिर ने आज क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी विशिष्ट पहचान बना ली है। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में विशेष चहल-पहल रहती है। पूजा-अर्चना, श्रद्धालुओं की भीड़ और मेले के आयोजन से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है।
वर्ष 1968 में रखी गई थी मंदिर की नींव
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रणचंडिका मंदिर का इतिहास कई दशक पुराना है। बताया जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व कामाख्या से आए अघोरी साधु लाल बाबा ने इस स्थान पर मां दुर्गा की स्थापना करने की सलाह दी थी। इसके बाद स्वर्गीय शिव सिंह ने वर्ष 1968 में मंदिर की नींव रखी। तभी से यहां मां दुर्गा की नियमित पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है।
समय के साथ मां के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था बढ़ती गई। स्थानीय ग्रामीणों और भक्तों के सहयोग से मंदिर का विस्तार किया गया और इसे भव्य स्वरूप प्रदान किया गया। आज यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि बैजानी गांव की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
नवरात्र में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़
नवरात्र के अवसर पर रणचंडिका मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। अष्टमी, नवमी और दशमी के अवसर पर मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन होता है। इस दौरान बैजानी के अलावा आसपास के गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और मां को डलिया अर्पित कर अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसी विश्वास के कारण प्रत्येक वर्ष नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है।
मंदिर परिसर में पूजा और मेले को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह रहता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भागीदारी से यह धार्मिक आयोजन क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूती प्रदान करता है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क

दुर्गा पूजा और मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। मेले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। असामाजिक तत्वों और मनचलों पर नजर रखने के लिए सादे वस्त्रों में भी पुरुष एवं महिला पुलिसकर्मियों को लगाया गया है।
बाईपास थाना अध्यक्ष विकास कुमार ने बताया कि पर्व को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन सतर्क है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।
वहीं, विधि-व्यवस्था के पुलिस उपाधीक्षक नवनीत कुमार ने मेला क्षेत्र के संवेदनशील स्थानों का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के मां के दर्शन कर सकें और पूजा का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो।
आस्था और परंपरा का प्रमुख केंद्र बना रणचंडिका मंदिर
बैजानी का रणचंडिका मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है। ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निरंतर विकास और नवरात्र में आयोजित होने वाला मेला इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है। मां के दर्शन के लिए दूर-दराज से पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस मंदिर के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाती है।
नवरात्र के उल्लास, पूजा-अर्चना और मेले की रौनक के बीच रणचंडिका मंदिर क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए हुए है। श्रद्धालु मां दुर्गा के चरणों में शीश झुकाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।















