
@भागलपुर और नवगछिया के बीच संचालित जहाज सेवा में अब आठ माह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को सफर की अनुमति नहीं, गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अलर्ट।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा की लहरों के बीच यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। भागलपुर और नवगछिया के बीच संचालित जहाज सेवा में अब आठ माह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को सफर की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन के इस फैसले का असर बुधवार को उस समय देखने को मिला, जब यात्रियों को लेकर गंगा में करीब 200 मीटर आगे बढ़ चुके जहाज को वापस घाट पर लौटने का निर्देश दिया गया। वजह थी जहाज पर आठ माह से अधिक की गर्भवती महिला का सवार होना।

महिला की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। जहाज को वापस घाट पर लाया गया और महिला को सुरक्षित उतारने के बाद ही पोत को दोबारा भागलपुर के लिए रवाना किया गया। इस घटना ने गंगा जहाज सेवा में सुरक्षा नियमों को लेकर प्रशासन की गंभीरता को एक बार फिर सामने ला दिया है।
पिछले दिनों नवगछिया की ओर स्थित जहान्वी चौक घाट से यात्रियों को लेकर एक जहाज भागलपुर के लिए रवाना हुआ। जहाज अभी नदी में करीब 200 मीटर ही आगे बढ़ा था कि प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना मिली कि उस पर आठ माह से अधिक की गर्भवती महिला सवार है। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने बिना देर किए वायरलेस और फोन के जरिए जहाज को वापस घाट पर लाने का निर्देश दिया। आदेश मिलते ही जहाज को वापस लौटाया गया। घाट पर पहुंचने के बाद तैनात मजिस्ट्रेट, आपदा मित्र और पुलिसकर्मियों ने महिला को सुरक्षित नीचे उतारा। इसके बाद सुरक्षा मानकों की दोबारा जांच की गई और जहाज को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया गया।
गंगा जहाज सेवा में गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की सतर्कता कोई नई बात नहीं है। इससे पहले बीते शनिवार को भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी। उस दिन चौसा निवासी मोहम्मद इरफान अपनी गर्भवती पत्नी के साथ गंगा पार करने के लिए जहाज पर सवार हुए थे।हालांकि, घाट पर तैनात मजिस्ट्रेट ने सुरक्षा नियमों का हवाला देते हुए महिला को यात्रा करने से रोक दिया था। इसके बाद दंपती को जहाज से सुरक्षित उतार दिया गया था।
सदर अनुमंडल पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि आठ माह से अधिक की गर्भवती महिलाओं के जहाज से सफर पर रोक लगाने का उद्देश्य महिला और उसके होने वाले बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। गंगा के बीच यात्रा के दौरान यदि किसी तरह की चिकित्सकीय आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
उन्होंने बताया कि घाटों पर तैनात आपदा मित्रों, दंडाधिकारियों और पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जहाज पर सवार होने वाले यात्रियों की सतर्कता से जांच करें। जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा है, तब तक जहाज को जेटी से रवाना नहीं होने दिया जाएगा।
















