
@ भागलपुर में विसर्जन शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब, 45 प्रतिमाओं का होना है विसर्जन; ढोल-नगाड़ों पर झूमे भक्त, युवाओं ने दिखाए लाठी-तलवार के करतब।
भागलपुर। नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना और उत्सव में डूबे भागलपुर में गुरुवार को विदाई की बेला आई तो शहर का माहौल भक्ति, उल्लास और भावुकता से भर उठा। जिन पूजा पंडालों में नौ दिनों तक मां के जयकारे गूंजते रहे, वहां से अब मां को विदा करने का समय आ गया था। श्रद्धालुओं ने नम आंखों और भरे मन से मां को विदाई दी। ढोल-नगाड़ों की थाप, गूंजते जयकारों और ‘अगले बरस फिर आना’ की प्रार्थना के बीच शहर की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।

दुर्गा पूजा महासमिति की मुख्य विसर्जन शोभायात्रा गुरुवार दोपहर तीन बजे स्टेशन चौक से निकली। परबत्ती पूजा समिति की प्रतिमा सबसे पहले स्टेशन चौक पहुंची। प्रतिमा के पहुंचते ही आसपास का इलाका श्रद्धालुओं से भर गया। कोई हाथ जोड़कर मां का आशीर्वाद मांग रहा था, तो कोई उनकी एक झलक को अपनी यादों में संजो लेना चाहता था।
दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष अभय घोष सोनू और महासचिव जयनंदन आचार्य के अनुसार, गुरुवार को कुल 45 प्रतिमाओं का विसर्जन होना है। इनमें 30 प्रमुख पूजा स्थलों की प्रतिमाएं मुख्य विसर्जन शोभायात्रा में शामिल हैं। शोभायात्रा स्टेशन चौक से वेराइटी चौक, खलीफाबाग चौक, कोतवाली चौक, नया बाजार, बूढ़ानाथ चौक, आदमपुर चौक, छोटी खंजरपुर और बड़ी खंजरपुर होते हुए मायागंज अस्पताल के पीछे स्थित मुशहरी घाट पहुंचेगी।
विसर्जन शोभायात्रा में भक्ति के साथ पारंपरिक उत्साह का भी रंग देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। वहीं, शोभायात्रा में शामिल युवाओं ने लाठी और तलवार के पारंपरिक करतब दिखाकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। करतब देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुटी रही।श्रद्धालु परिवार और दोस्तों के साथ मां के दर्शन करने पहुंचे। प्रतिमाओं के सामने हाथ जोड़कर लोगों ने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उत्सव की उमंग के बीच मां से बिछड़ने की कसक भी महसूस की जा रही थी।
शोभायात्रा में उमड़ी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन सतर्क रहा। सुरक्षा की कमान सिटी एसपी संभाल रहे थे। भीड़भाड़ वाले इलाकों और विसर्जन मार्ग पर पुलिस निगरानी रख रही थी, ताकि शोभायात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।वहीं, यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए निर्धारित मार्ग पर वाहनों के परिचालन को नियंत्रित किया गया और उन्हें वैकल्पिक रास्तों की ओर मोड़ा गया। स्टेशन चौक से खंजरपुर तक सड़कों पर भीड़ के कारण आम लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ा।
भागलपुर में बंगाली विधि-विधान से स्थापित दुर्गाबाड़ी और कालीबाड़ी की प्रतिमाओं का विसर्जन विजयादशमी के दिन बुधवार को ही कर दिया गया था। बरारी रिफ्यूजी कॉलोनी समेत कुछ अन्य स्थानों की प्रतिमाओं का विसर्जन भी एक दिन पहले हुआ। वहीं, शहरी क्षेत्र की अन्य पूजा समितियों की प्रतिमाओं का विसर्जन गुरुवार को निर्धारित मार्ग से किया गया।
नौ दिनों तक पूजा-अर्चना, आरती और जयकारों से गुलजार रहे पंडालों में अब विदाई का माहौल था। मां की प्रतिमाएं विसर्जन के लिए आगे बढ़ रही थीं और श्रद्धालु हाथ जोड़कर अंतिम प्रणाम कर रहे थे। उनके मन में मां के प्रति श्रद्धा के साथ अगले वर्ष उनके आगमन की प्रतीक्षा भी थी।
















