
@ भारत मंडपम में 7वें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन में शामिल हुए ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल, किसानों को अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता बनाने पर दिया जोर।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अब खेतों में सिर्फ अनाज ही नहीं उगेगा, बल्कि सूरज की रोशनी से ऊर्जा और समृद्धि की नई फसल भी तैयार होगी। कृषि और सौर ऊर्जा के समन्वय से किसानों की आमदनी बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और बिहार को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसी दूरदर्शी सोच को लेकर नई दिल्ली के प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित 7वें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन में भागलपुर के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू विधायक एवं बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने भाग लिया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन में कृषि भूमि के बेहतर उपयोग, सौर ऊर्जा उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, किसानों की आय बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों के जरिए सतत विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन ने कृषि और ऊर्जा के बीच तालमेल स्थापित कर किसानों के लिए आय के नए रास्ते खोलने की संभावनाओं को रेखांकित किया।

सम्मेलन में ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल ने किसानों को कृषि के साथ ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार का किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता बनकर भी प्रदेश की आर्थिक समृद्धि और ऊर्जा आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है।एग्रीवोल्टाइक्स तकनीक के माध्यम से कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ जोड़ने की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे भूमि के समुचित उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन और किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर पैदा करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और बिहार सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों के अनुरूप ऊर्जा विभाग हरित ऊर्जा, सौर ऊर्जा और आधुनिक ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कृषि और ऊर्जा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसानों के लिए आय के नए अवसर विकसित करना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना समय की मांग है।
7वें एग्रीवोल्टाइक्स विश्व सम्मेलन में कृषि और ऊर्जा के समन्वय पर हुई चर्चा बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए नई संभावनाओं की ओर संकेत करती है। किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने की पहल न केवल उनकी आय बढ़ाने का अवसर बन सकती है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार और ग्रामीण विकास को भी नई गति दे सकती है।
















