
@ कहलगांव के घोघा स्थित पन्नुचक पंचायत के मुसहर टोला की घटना ने इंसानियत और सामाजिक संवेदनशीलता पर खड़े किए सवाल।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड अंतर्गत घोघा के पन्नुचक पंचायत स्थित मुसहर टोला से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने गरीबी और बेबसी की दर्दनाक तस्वीर सामने ला दी है। एक व्यक्ति की मौत के बाद उसका परिवार इतना लाचार था कि उसके पास अंतिम संस्कार के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे। जिस परिवार को अपने परिजन को सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देनी चाहिए थी, वह चिता के लिए लकड़ी जुटाने तक के लिए संघर्ष करता रहा। घटना बीते मंगलवार की बताई जा रही है। मृतक के पत्नी सहित पांच बच्चे हैं।

बताया जाता है कि मौत के बाद परिजनों ने किसी तरह कर्ज लेकर दाह संस्कार के लिए लकड़ियों का इंतजाम किया। लेकिन आर्थिक तंगी की इंतहा ऐसी थी कि पर्याप्त लकड़ी नहीं जुटा पाने के कारण शव पूरी तरह जल नहीं पाया। अंततः अधजला शव को जमीन के अंदर गाड़ कर परिजन घर लौट आए।
घटना को लेकर मृतक के परिजनों ने यह भी बताया जा रहा है कि आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार ने लकड़ी खरीदने के लिए पैसों की मदद की आस में पंचायत के मुखिया के घर का दरवाजा खटखटाया। लेकिन आरोप है कि मुखिया ने दरवाजा तक नहीं खोला।
बताया जाता है कि मृत व्यक्ति नशे का आदी था। वह जितना कमाता था, उसका बड़ा हिस्सा कथित तौर पर शराब और अन्य नशा पीने में खर्च कर देता था। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित होती थी। हालांकि, नशे की लत अपनी जगह एक समस्या थी, लेकिन उसकी मौत के बाद परिवार के सामने खड़ी हुई अंतिम संस्कार की मजबूरी एक अलग और गंभीर मानवीय सवाल है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि समाज के उस तबके की बदहाली को भी सामने लाती है, जो दो वक्त की रोटी और बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करता है। मौत के बाद भी अगर किसी गरीब परिवार को अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने के लिए कर्ज लेना पड़े और शव का अंतिम संस्कार भी अधूरा रह जाए, तो यह समाज की संवेदनशीलता और जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मालूम हो कि घोघा स्थित विभिन्न पंचायतों में रहने वाले मुसहर परिवार पास के ईंट भट्ठों में मजदूरी करते हैं। इन भट्ठों में नशे के सौदागरों का धंधा चरम पर है।
















