
@ पिछले तीन दिनों में पुलिस की गिरफ्त में 25 पियक्कड़, मगर सवाल वही – शराब के असली सौदागरों तक कब पहुंचेगा कानून का हाथ?
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिले के कहलगांव में शाम ढलते ही लगता है जैसे कानून की किताब बंद और शराब के कारोबार की दुकान खुल जाती है! शहर से गांव तक कथित अवैध शराब कारोबारियों का नेटवर्क सक्रिय होने की चर्चा है। सुबह से शाम शराबबंदी के दावों के बीच अगर शराब की होम डिलीवरी और पसंदीदा ब्रांड की सप्लाई की खबरें सामने आ रही हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है – आखिर यह धंधा किसके भरोसे फल-फूल रहा है? क्या कानून का खौफ सिर्फ जाम छलकाने वालों तक सीमित है, या कारोबार की जड़ तक भी पहुंचेगा?

हैरानी देखिए, पुलिस कार्रवाई कर रही है, गिरफ्तारियां भी हो रही हैं, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगने के दावे के बीच जमीनी तस्वीर कई सवाल खड़े करती है। नवरात्र के दौरान प्रतिमा विसर्जन के मौके पर छह युवकों की गिरफ्तारी और पिछले तीन दिनों में शराब सेवन के आरोप में कुल 25 लोगों की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
कहलगांव में कथित तौर पर शराब की होम डिलीवरी का नेटवर्क भी सक्रिय बताया जा रहा है। आरोप है कि व्हाट्सऐप कॉल पर संपर्क होते ही ग्राहक के ठिकाने तक बोतल पहुंचाने की व्यवस्था हो जाती है। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि ग्राहकों की पसंद के ब्रांड भी उपलब्ध कराए जाते हैं।अगर ये दावे सही हैं, तो सवाल बेहद सीधा है – जब शराब की मांग, सप्लाई और ठिकानों की चर्चा खुलेआम हो रही है, तब इस नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने क्यों नहीं आती? शराब पीने वालों की गिरफ्तारी अपनी जगह, लेकिन अवैध सप्लाई करने वालों, भंडारण करने वालों और आर्थिक मदद देने वालों तक जांच पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। स्थानीय स्तर पर इस धंधे में कुछ रसूखदार लोगों के कथित तौर पर वित्तीय साझेदार होने की चर्चा भी है। सवाल यह है कि यदि पर्दे के पीछे कोई आर्थिक नेटवर्क काम कर रहा है, तो उसकी परतें कब खुलेंगी?
कहलगांव थानाध्यक्ष सह इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार के अनुसार, प्रतिमा विसर्जन के दौरान शराब सेवन के आरोप में छह युवकों को गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा गया। इसके अलावा, पर्व-त्योहार से पहले की कार्रवाई में भी पुलिस ने शराब के नशे के आरोप में 25 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी। असली सफलता गिरफ्तारियों की संख्या गिनने से नहीं, अवैध कारोबार की सप्लाई चेन तोड़ने से मापी जाएगी।
आखिर कब तक शराब सेवन के आरोप में पकड़े गए लोगों की सूची सुर्खियां बनती रहेगी और कथित कारोबार के बड़े नेटवर्क पर सवाल मंडराते रहेंगे? कानून का असली इम्तिहान यही है – जाम पीने वाले तक पहुंचना आसान है, लेकिन जाम भरने वाले पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी। अब देखना यह है कि कार्रवाई का दायरा सिर्फ पियक्कड़ों तक रहता है या कथित कारोबार के पीछे की पूरी कहानी भी सामने आती है।
















