
@ भागलपुर में बाढ़ ने पहले घर-मकान और खेत उजाड़े, अब जलीय जीवों की जिंदगी पर संकट के संकेत; गंगा में डॉल्फिन की सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा का रौद्र रूप इस बार सिर्फ इंसानी बस्तियों और किसानों के खेतों तक तबाही बनकर नहीं सिमटा। बाढ़ का पानी उतरने लगा है, लेकिन नदी की लहरों के बीच जलीय जीवों की जिंदगी पर पड़े असर की तस्वीरें भी सामने आने लगी हैं। भागलपुर के सबौर प्रखंड स्थित ममलखा में गंगा किनारे एक मगरमच्छ मृत अवस्था में मिला है। इस घटना ने बाढ़ के दौरान नदी के जलीय जीवों की दुश्वारियों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस बार गंगा की बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। कहीं तटबंध टूटे, कहीं घर-मकान जलधारा की भेंट चढ़ गए, तो कहीं किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं।

ममलखा में मृत मगरमच्छ मिलने के बाद उसकी मौत के कारणों को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। विक्रमशिला सेतु ध्वस्त होने के बाद से इस इलाके में मालवाहक बड़े जहाजों का परिचालन बदस्तूर जारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि कहीं बड़े जहाजों का परिचालन इस मौत की वजह तो नहीं है। क्या गांगेय डॉल्फिन भी इस खतरे की जद में हैं?
सुल्तानगंज से कहलगांव और बटेश्वर स्थान तक गंगा नदी का लगभग 55 किलोमीटर लंबा क्षेत्र फैला हुआ है। वर्ष 1991 में विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य के रूप में अधिसूचित यह क्षेत्र एशिया में लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। यह अभयारण्य देश में गंगा डॉल्फिन संरक्षण का एक अहम केंद्र माना जाता है।डॉल्फिन रिसर्च सेंटर, पटना के निदेशक डॉ. गोपाल शर्मा बताते हैं कि पांच वर्ष पूर्व, वर्ष 2018 में हुए सर्वेक्षण के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 150 से 180 डॉल्फिन की मौजूदगी पाई गई थी।
ममलखा में मगरमच्छ की मौत के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बाढ़ के इस भीषण दौर में डॉल्फिन समेत दूसरे जलीय जीवों को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा होगा। तेज बहाव, प्राकृतिक आवास में बदलाव, पानी के साथ बहकर आने वाले अवरोध और बड़े जहाजों का परिचालन उनके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, डॉल्फिन को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन करने के लिए वैज्ञानिक निगरानी और क्षेत्रीय सर्वेक्षण जरूरी हैं। ऐसे सर्वेक्षणों से यह समझने में मदद मिलेगी कि बाढ़ ने गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को कितना प्रभावित किया है और जलीय जीवों के संरक्षण के लिए किन कदमों की जरूरत है।
















