
श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन स्वामी नारायण दास जी महाराज ने सुनाई देवकी-वसुदेव और कंस की पूरी कथा, कारागार से लेकर श्रीकृष्ण जन्म तक के प्रसंगों की हुई जीवंत प्रस्तुति; भगवान विष्णु, ब्रह्मा और नारद मुनि की झांकी पर जमकर बजी तालियां

नवगछिया। गोपालपुर प्रखंड क्षेत्र के गोसाई गांव स्थित गंगा तट पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कथा स्थल का वातावरण पूरी तरह कृष्णमय हो गया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनते ही श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए। वहीं, धार्मिक प्रसंगों पर आधारित एक से बढ़कर एक आकर्षक झांकियों की प्रस्तुति ने आयोजन में चार चांद लगा दिए। विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इसके साथ ही कारागार के दृश्य की प्रस्तुति ने देवकी-वसुदेव के संघर्ष और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े प्रसंगों को सजीव कर दिया। गोसाई गांव के जगत लाल यादव की ओर से तैयार की गई भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा और देवर्षि नारद मुनि की खूबसूरत झांकी भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। इन सभी प्रस्तुतियों पर श्रद्धालुओं ने जमकर तालियां बजाईं और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
कंस की भविष्यवाणी से लेकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म तक की सुनाई पूरी कथा
श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन स्वामी नारायण दास जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े पौराणिक प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। महाराज जी ने बताया कि मथुरा में राजा कंस का शासन था। कंस अपनी बहन देवकी से अत्यंत स्नेह करता था। जब देवकी का विवाह वासुदेव जी के साथ हुआ और कंस स्वयं अपनी बहन को विदा कराकर ले जा रहा था, उसी समय आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस के अंत का कारण बनेगी। इस आकाशवाणी को सुनते ही कंस का व्यवहार बदल गया। अपनी मृत्यु के भय से उसने बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया।
महाराज जी ने कथा के माध्यम से बताया कि किस प्रकार कंस ने अपने प्राणों की रक्षा के लिए निर्दोष देवकी की संतानों पर अत्याचार किया। देवकी और वासुदेव को कारागार में अनेक प्रकार की यातनाएं सहनी पड़ीं। एक ओर माता देवकी अपनी संतानों को खोने का असहनीय दुख झेल रही थीं, तो दूसरी ओर वासुदेव जी विवश होकर सब कुछ देख रहे थे। कंस के अत्याचार लगातार बढ़ते जा रहे थे। मथुरा की प्रजा भी उसके भय और आतंक से परेशान थी।

कथा वाचन के दौरान महाराज जी ने बताया कि जब पृथ्वी पर अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ने लगा, तब देवताओं ने भगवान से धर्म की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए प्रार्थना की। भगवान ने धर्म की स्थापना और भक्तों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लेने का निर्णय किया। कथा के इन प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
आधी रात को कारागार में हुआ भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण
महाराज जी ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात के समय मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ। उस समय कारागार में पहरा देने वाले सैनिक निद्रा में चले गए। कारागार के बंधन खुल गए और वासुदेव जी के लिए भगवान के बाल स्वरूप को सुरक्षित गोकुल पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
भगवान श्रीकृष्ण को एक टोकरी में रखकर वासुदेव जी यमुना नदी पार करने के लिए निकले। उस समय भारी वर्षा हो रही थी और यमुना नदी उफान पर थी। लेकिन भगवान की दिव्य लीला से रास्ता बनता चला गया। शेषनाग ने अपने फन से भगवान के बाल स्वरूप को वर्षा से बचाया। वासुदेव जी भगवान को लेकर गोकुल पहुंचे और वहां नंद बाबा तथा माता यशोदा के घर पहुंचाया। इसके बाद वे नवजात कन्या को लेकर वापस कारागार लौट आए।
कथा के इस प्रसंग के दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाने लगे। महाराज जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक अवतार की कथा नहीं है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म की विजय, अन्याय पर न्याय की विजय और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी देता है।
बाल श्रीकृष्ण के स्वरूप ने श्रद्धालुओं को किया मंत्रमुग्ध
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का सबसे मनमोहक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब बाल श्रीकृष्ण के स्वरूप की झांकी प्रस्तुत की गई। बाल गोपाल के रूप में सजीव प्रस्तुति, आकर्षक वस्त्र, सुंदर मुकुट और मनमोहक सजावट ने श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित किया। भगवान के बाल स्वरूप को देखकर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं के चेहरे पर प्रसन्नता झलकने लगी।
जन्मोत्सव के प्रसंग के अनुरूप प्रस्तुत की गई इस झांकी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। श्रद्धालु बाल गोपाल के दर्शन कर आनंदित हुए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में झांकी को लेकर उत्साह देखने को मिला। लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ प्रस्तुति का स्वागत किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा और बाल स्वरूप की झांकी ने श्रद्धालुओं को मानो द्वापर युग के उस दिव्य प्रसंग से जोड़ दिया।
कारागार की झांकी ने देवकी-वसुदेव के संघर्ष को किया जीवंत
चौथे दिन के आयोजन में कारागार के दृश्य की झांकी भी विशेष आकर्षण रही। इस प्रस्तुति में राजा कंस के अत्याचार, देवकी और वासुदेव के कारागार में बंद रहने तथा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े प्रसंगों को दृश्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
कारागार की साज-सज्जा और कथा के अनुरूप तैयार किए गए दृश्य ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से पहले माता देवकी और पिता वासुदेव को जिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, उसे झांकी के माध्यम से समझाने का प्रयास किया गया। इस प्रस्तुति से कथा सुन रहे श्रद्धालुओं को धार्मिक प्रसंगों को नजदीक से देखने और महसूस करने का अवसर मिला।
कारागार की झांकी और बाल श्रीकृष्ण के स्वरूप की प्रस्तुति को एक साथ देखकर श्रद्धालुओं ने कलाकारों की सराहना की। कथा के प्रसंगों के साथ झांकियों का तालमेल आयोजन को और भी प्रभावशाली बना रहा था।
जगत लाल यादव की भगवान विष्णु, ब्रह्मा और नारद मुनि की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र
चौथे दिन की धार्मिक प्रस्तुतियों में गोसाई गांव के जगत लाल यादव की ओर से तैयार की गई भगवान विष्णु, भगवान ब्रह्मा और देवर्षि नारद मुनि की झांकी ने भी लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। तीनों धार्मिक स्वरूपों को बेहद खूबसूरत ढंग से सजाया गया था। झांकी की साज-सज्जा, वेशभूषा और प्रस्तुति देखकर श्रद्धालु काफी प्रभावित हुए।
भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप, भगवान ब्रह्मा के सृष्टिकर्ता स्वरूप और देवर्षि नारद मुनि की विशिष्ट वेशभूषा ने धार्मिक आयोजन को अलग ही रंग दे दिया। तीनों स्वरूपों की प्रस्तुति को देखकर कथा स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने जमकर तालियां बजाईं और इस आकर्षक प्रस्तुति की सराहना की।
भगवान विष्णु, ब्रह्मा और नारद मुनि की झांकी ने श्रीमद्भागवत कथा के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को भी दर्शाया। भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनकर्ता, भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता और देवर्षि नारद को भगवान के परम भक्त तथा देवताओं और ऋषियों के बीच संदेश पहुंचाने वाले के रूप में जाना जाता है। इन तीनों स्वरूपों की एक साथ प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह पैदा किया।
झांकियों की प्रस्तुति पर गूंजती रही तालियां, कलाकारों का बढ़ा उत्साह
चौथे दिन के आयोजन में कथा वाचन के साथ धार्मिक झांकियों की प्रस्तुति ने लोगों को पूरे समय बांधे रखा। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, कारागार के दृश्य और भगवान विष्णु, ब्रह्मा तथा नारद मुनि की झांकी के दौरान श्रद्धालुओं की ओर से लगातार तालियां बजाई गईं। प्रत्येक प्रस्तुति के बाद लोगों ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि धार्मिक कथाओं को केवल सुनाया ही नहीं गया, बल्कि झांकियों के माध्यम से उनके प्रमुख प्रसंगों को लोगों के सामने सजीव रूप में प्रस्तुत भी किया गया। इससे बच्चों और युवाओं को भी धार्मिक एवं पौराणिक कथाओं को समझने का अवसर मिला।
गोसाई गांव के युवाओं और स्थानीय लोगों की ओर से धार्मिक आयोजन में जिस प्रकार की भागीदारी निभाई जा रही है, उससे कथा स्थल पर प्रतिदिन उत्साह का माहौल बना हुआ है। झांकियों की तैयारी और प्रस्तुति में स्थानीय प्रतिभाओं की भागीदारी भी आयोजन को विशेष पहचान दे रही है।
गंगा तट पर कृष्णमय हुआ वातावरण, श्रद्धालुओं ने लिया कथा का आनंद
गंगा तट के समीप आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में चौथे दिन का पूरा कार्यक्रम भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को समर्पित रहा। स्वामी नारायण दास जी महाराज के मुखारविंद से देवकी-वसुदेव, कंस के अत्याचार और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा सुनकर श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। वहीं, विभिन्न धार्मिक झांकियों ने कथा को और अधिक आकर्षक बना दिया।
संध्या बेला में कथा स्थल पर श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। बाल गोपाल के दर्शन, कारागार की झांकी और भगवान विष्णु, ब्रह्मा तथा नारद मुनि की आकर्षक प्रस्तुति ने लोगों के मन पर विशेष छाप छोड़ी।
गोसाई गांव की युवा मंडली करा रही आठवीं बार श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
गोसाई गांव की युवा मंडली की ओर से प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी आठवीं बार सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन कराया जा रहा है। 28 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चलने वाले इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन स्वामी नारायण दास जी महाराज द्वारा श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है।
आयोजन का उद्देश्य गांव और आसपास के क्षेत्र के श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से धर्म, भक्ति, सदाचार और आध्यात्मिक विचारों से जोड़ना है। कथा के साथ धार्मिक झांकियों की प्रस्तुति भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर प्रस्तुत की गई विभिन्न झांकियों ने श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित किया। गंगा तट पर चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर ग्रामीणों और आसपास के श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।















