


आवाज, 24-25 अक्टूबर होगा दो दिवसीय महोत्सव
@ महोत्सव का अंग पुत्र गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे करेंगे उद्घाटन।
प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। अंगिका भाषा को संवैधानिक पहचान और उसका समुचित अधिकार दिलाने की मांग एक बार फिर तेज होती दिख रही है। भागलपुर के पटल बाबू रोड स्थित दिवंगत कांग्रेसी नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा के आवास पर आयोजित चिंतन बैठक में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि अब केवल मांग नहीं, बल्कि संगठित जनआंदोलन की आवश्यकता है।
अंग उत्थान आन्दोलन समिति, बिहार-झारखंड के बैनर तले आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमरेन्द्र ने की, जबकि संचालन समिति के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. जयंत जलद ने किया।
समिति के केंद्रीय अध्यक्ष गौतम सुमन गर्जना ने कहा कि अंगिका भाषा को भाषाई कोड और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए वर्षों से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी स्तर पर अपेक्षित पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब इस अभियान को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने अंगिका भाषा के संरक्षण, शिक्षा व्यवस्था में उसके विस्तार और सरकारी स्तर पर सम्मानजनक स्थान दिलाने की जरूरत पर जोर दिया। वक्ताओं का कहना था कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में अंगिका की उच्च शिक्षा उपलब्ध होने के बावजूद रोजगार के अवसर नहीं होने से युवा निराश हैं। उन्होंने विद्यालय से लेकर स्नातक स्तर तक अंगिका की पढ़ाई शुरू कराने और भाषा को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग दोहराई।
बैठक में सर्वसम्मति से 24 और 25 अक्टूबर को भागलपुर में दो दिवसीय अंगिका महोत्सव आयोजित करने का निर्णय लिया गया। कार्यक्रम के संयोजक गौतम सुमन गर्जना होंगे। इस अवसर पर गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दूबे से दूरभाष पर बातचीत कर महोत्सव का उद्घाटन करने का अनुरोध किया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। उनकी सहमति मिलने पर उपस्थित लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनका आभार जताया।
बैठक के अंत में दिवंगत कांग्रेसी नेता प्रवीण सिंह कुशवाहा को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए शोक संवेदना व्यक्त की।
















