


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने भागलपुर, कहलगांव और आसपास के तटीय क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। बीते 24 घंटे के भीतर कहलगांव में गंगा का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से 50 सेंटीमीटर बढ़ गया, जिससे नदी का रौद्र स्वरूप और अधिक भयावह होता नजर आ रहा है। जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण तटीय कटाव भी तेज हो गया है और नदी किनारे लगे पेड़-पौधे, घास-फूस तथा उपजाऊ मिट्टी लगातार गंगा की धारा में समाती दिखाई दे रही है।
केंद्रीय जल आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को कहलगांव में गंगा का जलस्तर 27.18 मीटर दर्ज किया गया, जबकि सोमवार को यह 26.68 मीटर था। महज एक दिन में आधा मीटर की वृद्धि ने प्रशासन और तटवर्ती गांवों के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
इसी तरह भागलपुर में गंगा का जलस्तर 27.80 मीटर दर्ज किया गया है। सोमवार को यहां जलस्तर 27.32 मीटर था। यानी यहां भी 24 घंटे के भीतर 48 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं मुंगेर में गंगा का जलस्तर 33.38 मीटर तक पहुंच गया है, जो लगातार बढ़ रहा है।
जल संसाधन विभाग ने गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन को पूरी तरह अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को तटबंधों की निगरानी, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर तटीय इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर कटाव तेज हो गया है। खेतों के किनारे दरक रहे हैं और नदी किनारे खड़े पेड़ एक-एक कर गंगा में समाते जा रहे हैं। यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
केंद्रीय जल आयोग के पूर्वानुमान के अनुसार, मुंगेर, फरक्का, हाथीदह और पटना सहित गंगा के कई प्रमुख घाटों पर जलस्तर में फिलहाल बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से नदी के किनारे अनावश्यक आवाजाही से बचने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा और सहायक नदियों से बढ़े जलप्रवाह के कारण गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। आने वाले दिनों में मौसम और बारिश की स्थिति के आधार पर जलस्तर में और बदलाव संभव है।
















