


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अंगिका साहित्य के लिए 2 अक्टूबर का दिन महत्वपूर्ण होने जा रहा है। अंग प्रदेश के वैजानी ग्राम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की बहुचर्चित आत्मकथा के अंगिका अनुवाद का लोकार्पण किया जाएगा। लंबे समय से प्रतीक्षित इस पुस्तक का अंगिका में अनुवाद डॉ. मनोज मीता ने किया है।

अंगिका साहित्य के वटवृक्ष डॉ. अमरेंद्र कहते हैं कि यह पुस्तक गांधी के विचारों और जीवन-दर्शन को मातृभाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल है। खास तौर पर इसलिए भी कि गांधी ने भागलपुर की अपनी यात्रा के दौरान मातृभाषा के महत्व पर विचार व्यक्त किए थे।
वे आगे कहते हैं कि डॉ. मनोज मीता ने गांधी की आत्मकथा को अंगिका में प्रस्तुत कर क्षेत्रीय भाषा और गांधी साहित्य के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बनाने का प्रयास किया है। पुस्तक का लोकार्पण अंगिका साहित्य और गांधी चिंतन से जुड़े लोगों के लिए एक विशेष अवसर माना जा रहा है।
2 अक्टूबर को वैजानी में होने वाला लोकार्पण समारोह इसी लंबे प्रयास और प्रतीक्षा का परिणाम होगा। पुस्तक के माध्यम से गांधी के जीवन, विचार और आत्मकथात्मक अनुभवों को अंगिका भाषा के पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

















