


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। अखिल भारतीय अंगिका साहित्य कला मंच की साहित्यिक शाखा ‘अंगवाणी’ की ओर से दिनकर स्मृति दिवस के रूप में साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। ईश्वर नगर (इशाकचक) स्थित ‘अंग-ऐंगना’ कार्यालय के साहित्यिक कक्ष में आयोजित संगोष्ठी की अध्यक्षता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. मधुसूदन झा ने की। कार्यक्रम का संचालन मंच के कार्यकारी अध्यक्ष एवं गीतकार राजकुमार ने गीत-कविताओं के बीच किया।
संगोष्ठी के आरंभ में सह-संयोजक विनोद राय ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के विराट व्यक्तित्व, साहित्यिक अवदान और अंग प्रदेश से उनके जुड़ाव पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रो. मधुसूदन झा ने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर अंग प्रदेश के सच्चे सपूत थे और उन्हें अंग संस्कृति तथा अंगिका से बेहद लगाव था। उन्होंने सरकार से भागलपुर में दिनकर जन्म पीठ की स्थापना करने की मांग की।

कार्यकारी अध्यक्ष एवं गीतकार राजकुमार ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर केवल ओज और तेज के कवि नहीं थे, बल्कि प्रणय और अनुराग को भी उन्होंने अपनी रचनाओं में सशक्त अभिव्यक्ति दी। उन्होंने कहा कि अंगराज कर्ण की उपेक्षा ने दिनकर को ‘रश्मिरथी’ जैसे कालजयी खंडकाव्य की रचना के लिए प्रेरित किया। युवा रचनाकार अभय कुमार भारती ने दिनकर से जुड़े प्रसंगों को साझा करते हुए बताया कि भागलपुर प्रवास के दौरान दिनकर ने अपनी कई महत्वपूर्ण कविताओं का सृजन किया था।
इस अवसर पर डॉ. जयंत जलद ने दिनकर की प्रमुख गद्य एवं पद्य रचनाओं को काव्य सूत्र में पिरोकर प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में मौजूद कवियों ने दिनकर पर आधारित अपनी कविताओं और गीतों का सरस पाठ कर राष्ट्रकवि को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कविता पाठ करने वालों में मंच के राष्ट्रीय महामंत्री कविरत्न महेंद्र प्रसाद निशाकर, प्रतिष्ठित कवि एवं लेखक सत्य नारायण मंडल, लोक गायक कपिलदेव कृपाला, रंगकर्मी शीतांशु अरुण, तिमाभावि के स्नातकोत्तर अंगिका विभाग के व्याख्याता डॉ. अनिल कुमार, अभय कुमार भारती और मंजीत झा सहित दर्जनभर कवि शामिल रहे।

















