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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। पेंशनर संघर्ष मंच (पीएसएम) ने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के पेंशन ग्रांट को बार-बार रोके जाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन और वित्त विभाग की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। मंच के सह-संयोजक अमरेन्द्र झा ने पूछा है कि जब बीएनएमयू का पेंशन ग्रांट नहीं रोका जाता, तो वित्त विभाग बार-बार सिर्फ टीएमबीयू के पेंशन ग्रांट पर ही रोक क्यों लगाता है।
पीएसएम ने कहा कि वर्तमान में टीएमबीयू के वित्तीय सलाहकार (एफए) के प्रभार में बीएनएमयू के एफए हैं। ऐसे में यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि यदि बीएनएमयू में पेंशन संबंधी वित्तीय मामलों का निराकरण एक व्यवस्था के तहत हो रहा है, तो उसी अनुरूप टीएमबीयू के पेंशन मामलों का समाधान क्यों नहीं कराया जा रहा है।
मंच ने सवाल उठाया कि वित्तीय मामलों में एफए का प्रस्ताव यदि अनिवार्य है, तो पेंशन ग्रांट से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एफए की ओर से प्रभावी पहल क्यों नहीं हो रही है? फरवरी माह का पेंशन ग्रांट रोके जाने के छह माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पेंशनरों को फरवरी की लंबित पेंशन भुगतान के संबंध में कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।
इसी बीच वित्त विभाग द्वारा अगस्त माह का टीएमबीयू का पेंशन ग्रांट भी रोक दिया जाना पेंशनरों के आक्रोश को और बढ़ा रहा है। पीएसएम ने कहा कि कुलपति, एफए, रजिस्ट्रार, एफओ और पेंशन शाखा से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मियों की चुप्पी कई गंभीर सवालों को जन्म देती है। आखिर पेंशनरों के मामले में ऐसी कार्यशैली क्यों अपनाई जा रही है।
पीएसएम द्वारा वित्त विभाग के स्तर पर बार-बार केवल टीएमबीयू का पेंशन ग्रांट रोके जाने की समीक्षा में दो प्रमुख कारण परिलक्षित हुए हैं – पूर्व वर्षों में सरकारी पेंशन अनुदान की राशि से एफडी किया जाना।
अद्यतन पेंशन ग्रांट की राशि से बैकलॉग पेंशन, ग्रेच्युटी, अर्नड लीव सहित अन्य एरियर्स के भुगतान को उपयोगिता प्रमाणन (यूसी) में दर्शाया जाना।


मंच ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सीधा सवाल किया है कि जब जून से अगस्त तक के वेतन अनुदान में कोई आपत्ति नहीं है, तो अगस्त माह के पेंशन ग्रांट को रोकने का कारण क्या है। क्या पेंशनरों के मामले में अलग मापदंड अपनाया जा रहा है।
पीएसएम ने कहा कि लगातार पेंशन ग्रांट रोके जाने और लंबित भुगतान के कारण विश्वविद्यालय के पेंशनरों में भारी आक्रोश है। मंच ने कुलपति से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर फरवरी माह की लंबित पेंशन तथा अगस्त माह के रोके गए पेंशन ग्रांट के मामले का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।
पीएसएम सह-संयोजक अमरेन्द्र झा ने कहा कि पेंशनरों को उनके हक की राशि के लिए महीनों इंतजार कराना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। यदि बीएनएमयू में पेंशन ग्रांट निर्बाध जारी हो सकता है, तो टीएमबीयू में बार-बार अड़चन क्यों? विश्वविद्यालय प्रशासन और एफए को इसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

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