


नवगछिया । गोपालपुर के मध्य विद्यालय मकंदपुर बड़ी, गोपालपुर में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ स्थानीय हुनर और पारंपरिक कारीगरी से जोड़ने की अनूठी पहल की गई। विद्यालय के विशिष्ट शिक्षक श्री ब्रजनंदन झा ने बेगलेस डे के अवसर पर विद्यार्थियों को कौशल विकास की दृष्टि से स्थानीय स्तर पर होने वाले विभिन्न प्रकार के कार्यों की जानकारी दिलाई। इस दौरान बच्चों को मकंदपुर के हाकिम मल्लिक के घर ले जाकर बांस एवं अन्य सामग्री से तैयार होने वाली विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया।
हाकिम मल्लिक के यहां बच्चों ने सूप, डाला, मोनी, झांप तथा फल एवं फूल रखने वाली टोकरी सहित विभिन्न प्रकार की पारंपरिक वस्तुओं के निर्माण की जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने कारीगरों द्वारा हाथों से तैयार की जाने वाली इन वस्तुओं को नजदीक से देखा और इनके निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री, बनाने की विधि तथा इनके उपयोग के बारे में जानकारी हासिल की। बच्चों ने इस दौरान कारीगरी से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझने में काफी रुचि दिखाई।

इसके बाद शिक्षक ब्रजनंदन झा के नेतृत्व में विद्यार्थियों को वर्षों से स्थापित कुलदीप लोहार के लघु उद्योग का भी भ्रमण कराया गया। यहां बच्चों ने लोहे से बनने वाले विभिन्न प्रकार के घरेलू एवं कृषि उपयोगी उपकरणों के निर्माण की प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा। विद्यार्थियों को कचिया, फार, छेनी, ग्रिल सहित अनेक प्रकार के उपकरणों को तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई। लोहार के कार्य में प्रयुक्त होने वाले औजारों, लोहे को विभिन्न आकारों में ढालने तथा उपयोगी उपकरण तैयार करने की प्रक्रिया को बच्चों ने उत्सुकता के साथ देखा।
विद्यालय की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्थानीय कला, पारंपरिक व्यवसाय, श्रम की महत्ता और कौशल आधारित कार्यों से जोड़ना है। विद्यालय स्तर पर इस प्रकार के व्यावहारिक अनुभव बच्चों को अपने आसपास मौजूद हुनर और रोजगार के विभिन्न अवसरों को समझने में भी मदद करते हैं।

विशिष्ट शिक्षक ब्रजनंदन झा ने बच्चों को स्थानीय कारीगरों के कार्यों से परिचित कराते हुए यह समझाने का प्रयास किया कि समाज में प्रत्येक प्रकार के श्रम और हुनर का अपना महत्व है। हाथों से वस्तुएं तैयार करने वाले कारीगरों की मेहनत, उनकी तकनीक और वर्षों के अनुभव से विद्यार्थियों को रूबरू कराना शिक्षा को व्यवहारिक और जीवनोपयोगी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानाध्यापक डॉ. शशिकांत सुमन ने बताया कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में सीखने की उत्सुकता दिनों-दिन बढ़ रही है। विद्यालय में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उनके आसपास मौजूद पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय कला-कौशल और विभिन्न व्यवसायों की व्यावहारिक जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को जब किसी कार्य को किताब में पढ़ने के बजाय उसे अपनी आंखों के सामने होते हुए देखने और समझने का अवसर मिलता है तो उनकी सीखने की क्षमता और जिज्ञासा दोनों बढ़ती हैं।
















