


@ बाढ़ के दौरान सबसे सख्त निर्देशों में से एक है – सूर्यास्त के बाद नाव का परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा नाव चलाने की जिम्मेदारी केवल निबंधित और वैध नाविकों को ही दी जाएगी।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बाढ़ के बढ़ते पानी के बीच नाव अब सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि हजारों लोगों के लिए जिंदगी की राह बन गई है। इसी को देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन ने नाव परिचालन को लेकर सुरक्षा का पूरा खाका तैयार किया है। अब बाढ़ में चलने वाली हर नाव की पहचान से लेकर उसकी क्षमता और यात्रा की सीमा तक सब कुछ स्पष्ट रहेगा।

नाव पर लाल झंडा लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही यह भी साफ लिखा रहेगा – ‘यह राज्य सरकार की ओर से निःशुल्क सेवा है।’ ओवरलोडिंग रोकने के लिए घाटों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर एक ही घाट से एक से अधिक नाव चलाने और स्थानीय चौकीदारों की तैनाती का भी प्रावधान किया गया है।
प्रशासन के निर्देशों में सबसे खास व्यवस्था वाटरलाइन की है। प्रत्येक नाव पर उसकी निर्धारित लोडिंग क्षमता अंकित होगी और पानी की अधिकतम सुरक्षित सीमा बताने के लिए नाव पर एक स्पष्ट वाटरलाइन पेंट की जाएगी। लोगों को इससे अंदाजा रहेगा कि पानी उस निशान से नीचे है तो नाव निर्धारित सुरक्षा सीमा में है।
नावों के लिए स्टार्ट प्वाइंट और डेस्टिनेशन प्वाइंट पहले से तय होंगे। नाविक अपनी मर्जी से मार्ग बदलकर परिचालन नहीं कर सकेंगे। निर्धारित घाटों पर ही नाव चलेगी और प्रशासन समय-समय पर इसकी जांच करेगा। संबंधित पर्यवेक्षक को नाव परिचालन के लिए जवाबदेह बनाया गया है।
चिन्हित घाटों और मार्गों की सूची पंचायत भवन, अंचल कार्यालय और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगाई जाएगी, ताकि आम लोगों को भी पता रहे कि सरकारी नाव सेवा कहां से और कहां तक उपलब्ध है।
प्रशासन ने प्रत्येक नाव के लिए अलग लॉग बुक रखने का निर्देश दिया है। यह लॉग बुक नाव पर ही उपलब्ध रहेगी और हल्का कर्मचारी या प्रतिनियुक्त पर्यवेक्षक हर तीन दिन में इसका सत्यापन करेगा।नावों पर लाइफ जैकेट, सुरक्षा छल्ले, टॉर्च, रस्सी, लंगर और बांस जैसे जरूरी सुरक्षा उपकरण रखना भी अनिवार्य किया गया है।

बाढ़ के दौरान सबसे सख्त निर्देशों में से एक है – सूर्यास्त के बाद नाव का परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा नाव चलाने की जिम्मेदारी केवल निबंधित और वैध नाविकों को ही दी जाएगी।
जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन नियमों का अक्षरशः पालन कराया जाए। मकसद साफ है – बाढ़ में राहत पहुंचाने वाली नाव किसी हादसे की वजह न बने और हर सफर सुरक्षित हो।
















