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प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बिहार के चर्चित ‘लव गुरु’ और पूर्व प्रोफेसर मटुकनाथ चौधरी एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके नाम से साझा किए गए एक पोस्ट में जीवन, महत्वाकांक्षा, गरीबी, शिक्षा और ऐयाशी को लेकर कम शब्दों में बेहद खुलकर विचार रखे गए हैं। पोस्ट में वह खुद को ‘ऐयाश प्रोफेसर’ बताते हुए कहते हैं कि उन्हें दुख पसंद नहीं है और गरीबी से उनका कोई नाता नहीं है। उनके इस अंदाज ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचा है।

पोस्ट में लिखा गया है कि उन्हें न तो विधायक, सांसद या मंत्री बनने की महत्वाकांक्षा है और न ही कुलपति बनने की इच्छा। विद्वान या साहित्यकार बनने की चाहत से भी खुद को दूर बताते हुए मटुकनाथ ने कहा कि उन्हें तो बस ‘पल-पल की ऐयाशी’ पसंद है। उन्होंने यह भी लिखा कि इस पसंद को उनसे कोई छीन नहीं सकता। उनके मुताबिक, लोगों के सामने दो ही रास्ते हैं या तो वे ईर्ष्या में जलें या उनसे थोड़ी ‘ऐयाशी’ सीखें।
मटुकनाथ का यह अंदाज नया नहीं है। वह लंबे समय से सामाजिक और निजी जीवन को लेकर अपने बेबाक बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। खासकर अपनी पूर्व छात्रा जूली के साथ प्रेम संबंध सार्वजनिक होने के बाद वह देशभर में चर्चित हो गए थे। वर्ष 2006 में उनके और जूली के रिश्ते की खबर सामने आने के बाद उन्हें पटना विश्वविद्यालय से निलंबन का सामना करना पड़ा था। बाद में बर्खास्तगी भी हुई, लेकिन वर्ष 2011 में उनकी बहाली का आदेश दिया गया।
मटुकनाथ चौधरी और जूली की मुलाकात वर्ष 2004 में हुई थी। उस समय मटुकनाथ बीएन कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे और जूली उनकी छात्रा थीं। दोनों के संबंध सार्वजनिक होने के बाद मामला सामाजिक और मीडिया बहस का विषय बन गया। मटुकनाथ ने अपने रिश्ते को छिपाने के बजाय सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया और लंबे समय तक जूली के साथ अपने संबंधों को लेकर खुलकर बात करते रहे।
उनकी इसी बेबाकी ने उन्हें ‘लव गुरु’ की पहचान दी। वर्ष 2018 में करीब 40 वर्ष की नौकरी के बाद सेवानिवृत्त होने के समय भी उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को लेकर खुलकर बयान दिए थे। उस समय उन्होंने खुद को ‘65 साल का लड़का’ बताते हुए दोबारा शादी करने की इच्छा जाहिर की थी।
अब ऐयाशी को लेकर बयान क्यों चर्चा में?
मटुकनाथ की हालिया पोस्ट का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा उनका जीवन के प्रति नजरिया है। उन्होंने महत्वाकांक्षा की दौड़ से खुद को अलग बताते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके लिए पद, प्रतिष्ठा और विद्वता से ज्यादा महत्वपूर्ण अपनी पसंद के मुताबिक जिंदगी जीना है।
‘दुख’, ‘गरीबी’, ‘शिक्षा’, ‘महत्वाकांक्षा’ और ‘साहित्य’ जैसे विषयों को एक साथ जोड़कर दिया गया उनका बयान सोशल मीडिया पर इसलिए भी चर्चा का विषय बन रहा है, क्योंकि मटुकनाथ की सार्वजनिक छवि ही परंपरागत सामाजिक मानदंडों को चुनौती देने वाले व्यक्ति की रही है।
पहले भी सोशल मीडिया पोस्ट से बटोरी थी सुर्खियां
मटुकनाथ पहले भी सोशल मीडिया पर निजी जिंदगी और जूली से जुड़े अनुभव साझा कर चर्चा में आ चुके हैं। वर्ष 2023 में उन्होंने अपने अकेलेपन और जूली से अलगाव को लेकर सोशल मीडिया पर विस्तार से लिखा था। उन्होंने बताया था कि जूली ने अलग जीवन जीने की इच्छा जताई थी और उन्होंने उसके फैसले को स्वीकार किया।
यही वजह है कि मटुकनाथ की नई पोस्ट सामने आते ही एक बार फिर उनके पुराने प्रशंसकों, आलोचकों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच चर्चा शुरू हो गई है। समर्थक इसे उनकी बेबाक जीवन-दृष्टि मान रहे हैं, जबकि आलोचक उनके शब्दों और ‘ऐयाशी’ की अवधारणा को अलग नजरिए से देख सकते हैं।

फिलहाल इतना तय है कि उम्र के इस पड़ाव पर भी मटुकनाथ चौधरी ने सार्वजनिक जीवन से खुद को पूरी तरह अलग नहीं किया है। उनकी पहचान आज भी प्रेम, निजी स्वतंत्रता और सामाजिक रूढ़ियों को लेकर दिए जाने वाले बेबाक बयानों से जुड़ी हुई है।
















