


@ विधायक शुभानंद मुकेश ने उठाई 87 किमी समर्पित कांवरिया पथ की मांग, कहा – सिर्फ सड़क नहीं, श्रद्धालुओं की सुरक्षा का सवाल।
प्रदीप विद्रोही
कहलगांव (भागलपुर)। भागलपुर के कहलगांव स्थित ऐतिहासिक बटेश्वर स्थान से झारखंड के प्रसिद्ध बासुकीनाथ धाम तक अब आस्था के साथ सुरक्षित सफर का रास्ता तैयार करने की मांग तेज हो गई है। कहलगांव विधायक शुभानंद मुकेश ने पथ निर्माण विभाग के मंत्री से मिलकर अपने पत्र के माध्यम से बिहार सीमा के भीतर करीब 87 किलोमीटर लंबे समर्पित कांवरिया पथ के निर्माण की स्वीकृति देने की मांग की है।

विधायक ने अपने पत्र में बिहार विधानसभा में 25 फरवरी 2026 को हुए ध्यानाकर्षण का हवाला देते हुए कहा है कि सदन में सरकार की ओर से इस दिशा में तकनीकी संभाव्यता, संसाधनों की उपलब्धता और शिव सर्किट के व्यापक विकास के तहत समीक्षा करने का आश्वासन दिया गया था। अब उन्होंने इस आश्वासन को जमीन पर उतारने के लिए विभाग से ठोस पहल की मांग की है।
123 किमी की यात्रा, बिहार में 87 किमी का हिस्सा:
कहलगांव के बटेश्वर स्थान से बासुकीनाथ धाम की कुल दूरी करीब 123 किलोमीटर बताई गई है। इसमें बिहार सीमा के भीतर आने वाले मार्ग को समर्पित कांवरिया पथ के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित मार्ग में –
कहलगांव से घोघा – 10 किमी, घोघा से सन्हौला – 16 किमी, सन्हौला से पंजबाड़ा/सबौर – 27 किमी, पंजवारा से विक्रमपुर – 2.60 किमी, विक्रमपुर से बौंसी – 7.50 किमी, बौंसी से बिहार-झारखंड सीमा – 14 किमी शामिल हैं।
यानी बिहार में करीब 87 किलोमीटर का ऐसा धार्मिक मार्ग, जिस पर श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में कांवरिया आवाजाही करते हैं।
सवाल सिर्फ सुविधा का नहीं, सुरक्षा का भी:
विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि इस मार्ग पर प्रतिवर्ष श्रावणी मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कांवर यात्रा करते हैं। ऐसे में सामान्य यातायात वाली सड़कों पर पैदल चलने वाले कांवरियों को भारी वाहनों और अन्य वाहनों के बीच सफर करना पड़ता है।
समर्पित कांवरिया पथ बनने से श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सकेगा। साथ ही दुर्घटनाओं में कमी आने, स्थानीय बाजारों को बढ़ावा मिलने और पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
DPR से शुरू हो ‘बासुकीनाथ कॉरिडोर’ की कवायद
शुभानंद मुकेश ने पथ निर्माण विभाग से इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) जल्द तैयार कराने की मांग की है। उनका कहना है कि तकनीकी और वित्तीय पहलुओं की समीक्षा के बाद परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए। पत्र में शिव सर्किट से जुड़े धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने की सरकार की पूर्व घोषणा का भी उल्लेख किया गया है।
113 साल से ज्यादा पुरानी आस्था को सड़क का इंतजार:
विधायक ने बटेश्वर स्थान के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह क्षेत्र लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है। यहां से बासुकीनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या श्रावणी मेले के दौरान काफी बढ़ जाती है।
अगर सरकार इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ती है तो कहलगांव से बिहार-झारखंड सीमा तक का 87 किमी मार्ग आने वाले वर्षों में श्रावणी यात्रा के लिए एक समर्पित धार्मिक कॉरिडोर का रूप ले सकता है।
















