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भागलपुर में आयोजित जन-आक्रोश महिला सम्मेलन के दौरान महिला आरक्षण को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई। प्रेस वार्ता में बिहपुर विधायक इंजीनियर शैलेंद्र ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत सदियों से नारी शक्ति का पूजक रहा है, लेकिन राजनीति में महिलाओं की भागीदारी हमेशा सीमित रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने वर्षों तक महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल राजनीति की, लेकिन संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए ठोस पहल नहीं की।

नेताओं ने जानकारी दी कि 16 अप्रैल 2026 को संसद में संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश विधेयक पेश किए गए हैं। इन विधेयकों का उद्देश्य वर्ष 2029 तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना है।

वक्ताओं ने कहा कि यह केवल आरक्षण नहीं, बल्कि लोकतंत्र में महिलाओं की निर्णायक भागीदारी की शुरुआत है। उनका दावा है कि इससे देश की राजनीति में संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और संतुलन का एक नया अध्याय शुरू होगा।

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