


रस्सी से खींचकर नाव को सुरक्षित महादेवपुर घाट तक पहुंचाया गया
नवगछिया : विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद गंगा पार करने के लिए नाव ही लोगों का मुख्य सहारा बनी हुई है। लेकिन लगातार हो रही तकनीकी खराबियों ने यात्रियों की चिंता और बढ़ा दी है। सोमवार को भागलपुर बरारी घाट से महादेवपुर घाट आ रही यात्रियों से भरी एक नाव बीच गंगा की धारा में अचानक खराब हो गई, जिससे नाव पर सवार लोगों के बीच अफरा-तफरी और भय का माहौल बन गया।

बताया गया कि नाव महादेवपुर घाट से कुछ दूरी पहले ही बीच धारा में बंद पड़ गई। नाव पर महिलाएं, छात्राएं, बीमार यात्री और कई अन्य लोग सवार थे। नाव के अचानक रुक जाने के बाद गंगा की तेज लहरों में वह डगमगाने लगी, जिससे यात्री दहशत में आ गए।
घटना की सूचना मिलते ही SDRF टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने बीच गंगा में फंसी नाव को नियंत्रित कर सुरक्षित किनारे लगाने का प्रयास शुरू किया। इसी दौरान महादेवपुर घाट पर तैनात कार्यपालक दंडाधिकारी को भी सूचना दी गई, जिसके बाद आपदा मित्रों और एक बड़ी नाव को राहत कार्य के लिए भेजा गया।

रेस्क्यू अभियान में आपदा मित्र पंकज कुमार, नंदकिशोर, दीपक कुमार सहित SDRF के जवान सक्रिय रहे। करीब 15 मिनट तक चले संयुक्त अभियान के बाद बड़ी नाव में रस्सी बांधकर खराब नाव को खींचते हुए सुरक्षित महादेवपुर घाट तक लाया गया।
रेस्क्यू के दौरान बीमार यात्रियों और उनके परिजनों को SDRF की नाव से सुरक्षित बाहर निकाला गया। सुरक्षित किनारे पहुंचने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली।

घटना के बाद डरे-सहमे यात्रियों ने बताया कि बीच नदी में नाव खराब होने से कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो बड़ा हादसा हो जाएगा। गंगा की तेज लहरों के बीच नाव लगातार हिल रही थी और सभी लोग काफी घबरा गए थे। यात्रियों ने SDRF टीम और आपदा मित्रों की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि उनकी वजह से सभी लोग सुरक्षित घाट तक पहुंच सके।
गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले भी एक नाव की पंखी टूट जाने के कारण वह कुछ देर तक बीच गंगा में फंसी रही थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद नावों की तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
















