


@ लगातार सड़क हादसों से सहमी छात्रा ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, NHAI ने पहुंचकर किया स्थलीय निरीक्षण; गोलंबर, साइनेज और स्पीड ब्रेकर का आश्वासन।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। कभी-कभी बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी कलम से होती है। उम्र महज 15-16 वर्ष, लेकिन सोच पूरे समाज की सुरक्षा की। पीरपैंती स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बसंतपुर की 10वीं कक्षा की छात्रा कुमारी रक्षिता ने जब हीरानंद मोड़ पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को देखा, तो चुप रहने के बजाय सीधे देश के प्रधानमंत्री को पत्र लिख दिया। छात्रा की इस पहल ने आखिरकार जिम्मेदार तंत्र का ध्यान उस खतरनाक मोड़ की ओर खींच दिया।
रक्षिता की आवाज अब अधिकारियों के कानों तक पहुंच चुकी है। 14 सितंबर 2026 को NHAI, पटना की टीम जिले के पीरपैंती स्थित हीरानंद मोड़ पहुंची और स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सड़क की स्थिति, तीव्र मोड़ और वाहनों की तेज रफ्तार से उत्पन्न दुर्घटनाओं की आशंका को गंभीरता से देखा।

निरीक्षण के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भी अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। सरपंच संघ के प्रखंड अध्यक्ष बरूण गोस्वामी, मुन्ना सिंह, ऋषिकेश तिवारी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मार्ग पर वाहनों की तेज गति और मोड़ की स्थिति राहगीरों के लिए लगातार खतरा बनी हुई है।
अब उम्मीद की एक नई किरण:
स्थलीय निरीक्षण के बाद NHAI के अधिकारियों ने जनहित और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हीरानंद मोड़ पर गोलंबर (राउंडअबाउट) बनाने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही आवश्यक साइनेज और स्पीड ब्रेकर लगाने की बात भी कही गई है। अधिकारियों की इस पहल से स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों में खुशी की लहर है। वर्षों से जिस समस्या को लोग झेल रहे थे, उस पर एक स्कूली छात्रा की पहल ने अब समाधान की उम्मीद जगा दी है।
हीरानंद गांव निवासी कुमारी रक्षिता, पिता अमरनाथ तिवारी, ने अपनी चिंता को सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं रखा। उसने उस सड़क से गुजरने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा को अपना मुद्दा बनाया और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर समस्या के समाधान की गुहार लगाई। रक्षिता की पहल आज क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि ‘छोटी-सी उम्र, बड़ी सोच’ का इससे बेहतर उदाहरण शायद ही मिले।

















