


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के राघोपुर बांध से लौटते ही देर रात बांध क्षेत्र में सन्नाटा पसरा नजर आया। रात करीब 9:30 बजे की सामने आई तस्वीरों में मौके पर अपेक्षित गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जिस संवेदनशील बांध क्षेत्र में बचाव और राहत कार्य को लेकर सीएम सम्राट चौधरी के निर्देश के पश्चात दिन-रात बचाव कार्य करने का प्रशासनिक सक्रियता की जरूरत है, वहां देर रात जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कांट्रेक्टर की मौजूदगी क्यों नहीं दिख रही है। इधर कटाव में स्थिरता तो आई है परंतु गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं रेलवे लाइन बांध के नीचे से पानी का बहाव भी शुरू हो चुका है। आशंका यह जतायी जा रही है कि कहीं

ऐसे में यह चूक कहीं खतरे की घंटी न घनघना उठे।
सीएम ने अपने निर्देश में दो टूक कहा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे कम्युनिटी किचन संचालित करने, मोबाइल मेडिकल टीम कार्यरत एवं नाव/मोटरबोट की पर्याप्त व्यवस्था रहे।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हरसंभव सहायता एवं राहत उपलब्ध कराने, आपदा सम्पूर्ति पोर्टल को अद्यतन रखने तथा प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध रखने का निर्देश दिया। तटबंधों की लगातार निगरानी की जाए और जहां भी कटाव या क्षति की स्थिति उत्पन्न हो, वहां तत्काल आवश्यक सुरक्षात्मक एवं मरम्मत कार्य कराए जाएं, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राघोपुर बांध पर बचाव एवं राहत कार्य को लेकर प्रशासनिक अमला सक्रिय नजर आया। मुख्यमंत्री के साथ अधिकारियों की टीम और राहत-बचाव से जुड़ी गतिविधियां भी मौके पर चलती रहीं। लेकिन मुख्यमंत्री के वापस लौटने के बाद स्थिति बदलती दिखाई दी।
रात 9:30 बजे की तस्वीरों में पसरा सन्नाटा:
राघोपुर बांध की रात करीब 9:30 बजे की तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। मौके पर न तो पहले जैसी प्रशासनिक हलचल नजर आ रही है और न ही संबंधित अधिकारियों तथा कांट्रेक्टर की मौजूदगी स्पष्ट दिखाई दी। मजदूरों का हुजूम भी नदारद। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
बांध की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर रात के समय किसी तरह की आपात स्थिति उत्पन्न होती है तो मौके पर तत्काल जिम्मेदारी संभालने के लिए कौन मौजूद है?
गंगा को खुली चुनौती:
राघोपुर रेलवे बांध और आसपास का इलाका गंगा के बढ़ते जलस्तर तथा संभावित दबाव को लेकर संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में बांध की सुरक्षा और निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बांध जैसे संवेदनशील स्थान पर दिन-रात निगरानी और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता बनी रहनी चाहिए। यदि रात में अधिकारी और संबंधित एजेंसी के जिम्मेदार लोग मौके पर मौजूद नहीं हैं, तो प्रशासन को इसकी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
फिलहाल राघोपुर बांध की रात की तस्वीरें प्रशासनिक व्यवस्था और बांध की सुरक्षा को लेकर कई सवाल जरूर खड़े कर रही हैं। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या जवाब देता है।

















