
@ भागलपुर जिले में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस (GIS) अध्ययनों के अनुसार, कुल दियारा क्षेत्र लगभग 1,073.04 वर्ग किलोमीटर है। कलई की बुआई से लेकर कटाई तक गंगा और उससे सटे कोसी दियारा क्षेत्र में दबंगों का जो तांडव होता है, वह किसी से छिपा नहीं है।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। गंगा का जलस्तर घटने और पानी के अपनी पुरानी धारा की ओर लौटने के साथ ही जिले के गंगा दियारा क्षेत्रों में एक अलग ही तस्वीर उभरने लगी है। बाढ़ की विभीषिका के बाद गंगा के पेट से निकली जमीन पर गाद और सफेद बालू की मोटी परत दिखाई देने लगी है। कई स्थानों पर गाद से भरे विस्तृत भूभाग और सफेद बालू के टीले नजर आ रहे हैं। यही जमीन अब किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। स्थानीय किसानों को उम्मीद है कि गंगबरार यानी गंगा की धारा से निकलकर उभरी नई जमीन पर आने वाले समय में अच्छी पैदावार होगी। यदि जमीन की मिट्टी और नमी खेती के अनुकूल रही, तो यहां दलहन, सब्जियों और अन्य मौसमी फसलों की खेती से किसानों को बेहतर आमदनी हो सकती है।

इस वर्ष गंगा ने अपने रौद्र रूप से भागलपुर जिले के बड़े हिस्से में भारी तबाही मचाई। गंगा के उफान और बाढ़ के कारण हजारों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ। खासकर नवगछिया, पीरपैंती और सबौर सहित गंगा के तटीय इलाकों में बाढ़ का असर काफी गंभीर रहा। नवगछिया के राघोपुर में बांध टूटने के बाद स्थिति और भयावह हो गई। लोगों के घर-आंगन से लेकर खेत-खलिहान तक पानी और तबाही का मंजर दिखाई देने लगा। दर्जनों घरों को गंगा लील गई। हजारों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले की कुल 111 पंचायतों, 447 गांवों और 892 वार्डों में बाढ़ का असर पड़ा था। इससे कुल 2,17,168 परिवारों के 9,39,791 लोग प्रभावित हुए थे। करोड़ों रुपये खर्च कर राघोपुर को बचाने की भरपूर कोशिश की गई। वहीं, जिले में करीब 31 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में लगी फसल बर्बाद होने का आंकड़ा सामने आया है।
भागलपुर जिले में रिमोट सेंसिंग और जीआईएस (GIS) अध्ययनों के अनुसार, कुल दियारा क्षेत्र लगभग 1,073.04 वर्ग किलोमीटर है। भौगोलिक बनावट और मिट्टी की उम्र के आधार पर इसे दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है।पुरानी दियारा भूमि (Old Diara Land) जो लगभग 203.26 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है और मुख्य रूप से जिले के छह प्रखंडों के अंतर्गत आती है। नई दियारा भूमि (New Diara Land) जो लगभग 869.78 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है और जिले के 13 प्रखंडों को कवर करती है।
दियारा क्षेत्र में आमतौर पर मिट्टी, पानी और मौसमी परिस्थितियों के अनुरूप खेती की जाती है। ऐसे में नई जमीन पर कलई, मसूर, मक्का, गेंहू और मूंग जैसी फसलों के साथ परवल, करेला, कद्दू, ककड़ी और तरबूज जैसी सब्जियों की खेती की संभावनाएं किसानों को उत्साहित कर रही हैं। बेल वाली सब्जियों और फलों में परवल, खीरा, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, कद्दू, करेला, झींगा और लौकी की अच्छी पैदावार होती है। भागलपुरी परवल और नवगछिया का केला तो देशभर में प्रसिद्ध हैं।

दूसरी ओर, कलाई की बुआई से लेकर कटाई तक गंगा और कोसी दियारा क्षेत्रों में दबंगों का जो तांडव होता है, वह किसी से छिपा नहीं है। खेतों के मालिक बुआई करते हैं और फसल के लहलहाते ही दबंगों के गुर्गे कटाई करने पहुंच जाते हैं। अंततः किसानों को खाली हाथ घर लौटना पड़ता है।
गंगा का जलस्तर घटने के बाद जहां किसानों के चेहरों पर खुशी दिखाई दे रही है, वहीं इस नई जमीन के साथ एक गंभीर सामाजिक और कानूनी सवाल भी जुड़ा हुआ है। गंगा दियारा में हर साल धारा बदलने के कारण कहीं जमीन कट जाती है, तो कहीं नए भूभाग उभर आते हैं। इससे जमीन की सीमाएं भी बदलती रहती हैं। ऐसे में नई उभरी जमीन पर मालिकाना हक को लेकर विवाद की आशंका बनी रहती है।
नई जमीन पर किसका अधिकार होगा? पुराने भूखंडों के मालिक, स्थानीय किसान और जमीन पर लंबे समय से खेती करने का दावा करने वाले लोग अपने-अपने दावे पेश कर सकते हैं। जमीन की सीमाओं और स्वामित्व को लेकर स्पष्टता नहीं होने की स्थिति में विवाद गहराने की आशंका रहती है।















