


@ पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने भी इसी सवाल को जांच का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि मामले की तकनीकी जांच कराई जाएगी। प्रथम दृष्टया निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी स्तर पर किसी त्रुटि की आशंका जताई गई है।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। वैशाली में निर्माणाधीन पुल पर कुछ सेकेंड की चूक ने मजदूरों की जान सांसत में डाल दी। सवाल सिर्फ हादसे का नहीं, उस भारी लॉन्चिंग गार्डर के अचानक पीछे खिसकने का है, जिसे पुल का स्लैब आगे लॉन्च करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

वैशाली के लालगंज में भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे फोरलेन पुल पर गुरुवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब स्लैब लॉन्च करने वाला भारी-भरकम लॉन्चिंग गार्डर आगे बढ़ने के बाद अचानक पीछे की ओर स्लाइड कर गया। गार्डर टिल्ट होकर नीचे की तरफ गिरा तो मौके पर मौजूद मजदूरों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। जान बचाने के लिए कई मजदूरों ने नीचे छलांग लगा दी।
हादसे में करीब 8 मजदूर घायल हुए। सभी को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति सामान्य बताई गई और बाद में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी बड़े जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर स्लैब लॉन्च करने के बाद आगे बढ़ रहा गार्डर अचानक पीछे की ओर क्यों आया? भागलपुर पहुंचे पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने भी इसी सवाल को जांच का केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि मामले की तकनीकी जांच कराई जाएगी। प्रथम दृष्टया निर्माण कार्य के दौरान तकनीकी स्तर पर किसी त्रुटि की आशंका जताई गई है।
यानी अब जांच सिर्फ यह नहीं देखेगी कि हादसा कैसे हुआ, बल्कि यह भी पता लगाया जाएगा कि गार्डर के पीछे खिसकने की वजह तकनीकी खराबी थी, संचालन में गलती थी या निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी रह गई थी।
मजदूरों ने छलांग लगाकर बचाई जान
हादसे का सबसे खौफनाक पहलू यह था कि गार्डर के अचानक पीछे आने के बाद मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अपनी जान बचाने के लिए कई मजदूरों ने वहां से छलांग लगा दी।
यही छलांग उनके घायल होने की वजह बनी, लेकिन संभवतः इसी फैसले ने उन्हें भारी उपकरण की चपेट में आने से भी बचाया।
जांच से खुलेगा निर्माण सुरक्षा का सच
यह घटना अब निर्माणाधीन पुलों पर इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरणों की सुरक्षा और तकनीकी निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रही है। लॉन्चिंग गार्डर जैसे भारी उपकरणों के संचालन में छोटी-सी तकनीकी या ऑपरेशनल चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
इसीलिए विभागीय जांच में गार्डर के संचालन, तकनीकी स्थिति, निर्माण प्रक्रिया और मौके पर मौजूद सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल अहम होगी।

















