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@ पांच मौतों वाले घर में पहुंचे पप्पू यादव, 15 दिन से लापता युवक के परिवार से मिले; राहत के साथ व्यवस्था पर बरसे।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। मटमैले पानी में डूबे घर… छतों पर टंगी उम्मीद… भूख-प्यास से बेहाल परिवार और अपनों को खोने का ऐसा दर्द, जिसका कोई मुआवजा नहीं। भागलपुर के बाढ़ग्रस्त इलाकों में शुक्रवार को पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव पहुंचे तो उनके सामने बाढ़ की वह तस्वीर थी, जिसमें पानी से ज्यादा लोगों की आंखों में बेबसी नजर आई।
खरीक के राघोपुर से लेकर गोराडीह के कोयली खुटाहा तक सांसद ने बाढ़ की भयावहता को करीब से देखा। कहीं लोग घर बचाने की जद्दोजहद में थे तो कहीं परिवार के सदस्य अपनों की तलाश में थे। सांसद ने पीड़ितों से मुलाकात की, आर्थिक मदद पहुंचाई और साथ ही बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था पर तीखे सवाल भी खड़े किए।
गोराडीह के कोयली खुटाहा गांव में बाढ़ ने एक परिवार पर ऐसा कहर बरपाया कि पांच जिंदगियां एक साथ खत्म हो गईं। मुकेश साह की पत्नी मंथो देवी, पुत्री सोनाक्षी (13), पुत्र अभिषेक (10), पुत्र अक्षय (8) और पड़ोसी कपिलदेव साह की पुत्री अंशु (17) की पानी में डूबने से मौत हो गई। सांसद जब इस परिवार के बीच पहुंचे तो परिजनों का विलाप देख भावुक हो उठे। उन्होंने प्रत्येक मृतक के नाम पर 10-10 हजार रुपये के हिसाब से 50 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी।
लोदीपुर के बादल मंडल का परिवार भी दर्द की इसी कहानी को जी रहा है। करीब 15 दिन पहले गंगा के तेज बहाव में बह गए बादल का अब तक कोई पता नहीं चला है। शव नहीं मिलने से परिवार अंतिम दर्शन तक नहीं कर सका है। पप्पू यादव ने परिजनों से मुलाकात कर उन्हें 25 हजार रुपये की सहायता दी। वहीं लोगों की मदद के लिए अपनी जमीन बेचकर करीब 70 लाख रुपये में नाव तैयार कराने वाले सिकंदर मंडल की नाव बाढ़ में डूबने के बाद उनके परिजनों को भी 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी।
खरीक के राघोपुर के वार्ड 8 और 9 में सांसद ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने 100 से अधिक बेसहारा बाढ़ पीड़ित महिलाओं को तत्काल भरण-पोषण के लिए अपनी ओर से नकद सहायता उपलब्ध कराई।


पीड़ितों से मिलने के बाद सांसद ने सरकार और प्रशासन की बाढ़ राहत व्यवस्था पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस मां-बाप का बेटा 15 दिनों से गंगा में लापता हो और जिसे अंतिम बार देखने तक का अवसर न मिला हो, उस परिवार की चीखें किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को भीतर तक हिला देंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि एंटी-इरोजन और फ्लड फाइटिंग के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन बाढ़ आते ही तटबंध और व्यवस्था दोनों की कमजोरियां सामने आ जाती हैं।
पप्पू यादव ने सवाल उठाया कि जब सरकारी खजाने में धन की कमी नहीं है तो बाढ़ से तबाह परिवारों तक तत्काल पर्याप्त आर्थिक सहायता क्यों नहीं पहुंचाई जा रही है। सांसद ने बाढ़ में मारे गए बच्चों के आश्रितों को कम से कम 10-10 लाख रुपये तथा अन्य मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये तत्काल देने की मांग की। उन्होंने बाढ़ में डूबी नाव का उचित मुआवजा देने की भी मांग उठाई।
पप्पू यादव ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण के नाम पर पिछले चार दशक में हुए काम और खर्च की जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को कई बार पत्र लिखने के बाद अब वे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और जल संसाधन विभाग, सिंचाई परियोजनाओं, तटबंध निर्माण तथा फ्लड फाइटिंग के नाम पर हुए खर्च की उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे। उन्होंने ठेकेदारों, अधिकारियों और कथित तौर पर लाभान्वित हुए लोगों की संपत्तियों की जांच की भी मांग करने की बात कही।

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