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@ कहलगांव, गोराडीह और सबौर के प्रभावित इलाकों का अधिकारियों ने किया स्थलीय निरीक्षण; 4 नवंबर को प्रस्तावित किसान धरना-प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन पर हुआ स्थगित।

प्रदीप विद्रोही

भागलपुर। कहलगांव, गोराडीह एवं सबौर प्रखंड के हजारों एकड़ कृषि भूमि में वर्षों से बनी जलजमाव की गंभीर समस्या को लेकर किसानों की परेशानी अब प्रशासन तक पहुंच गई है। लंबे समय से खेतों में पानी जमा रहने के कारण खेती-किसानी प्रभावित होने और जमीन अनुपयोगी बने रहने की समस्या को लेकर किसानों के लगातार संघर्ष के बाद बुधवार को जिला प्रशासन की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।निरीक्षण के दौरान गोराडीह के बीडीओ, सीओ एवं पुलिस निरीक्षक सहित प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने जलजमाव से प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समस्या की स्थिति को समझने का प्रयास किया।

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बताया जाता है कि जलजमाव की समस्या से परेशान किसानों ने 4 नवंबर को धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया था। किसानों की मांग थी कि वर्षों से खेतों में जमा पानी की निकासी के लिए प्रभावी व्यवस्था की जाए, ताकि हजारों एकड़ कृषि भूमि को दोबारा खेती योग्य बनाया जा सके। हालांकि, जिला प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने और समस्या के समाधान की दिशा में पहल करने का आश्वासन मिलने के बाद प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया था। इसी आश्वासन के आलोक में बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।

किसानों का कहना है कि जलजमाव के कारण उनकी कृषि भूमि लंबे समय से प्रभावित है। खेतों में पानी जमा रहने से खेती करना मुश्किल हो गया है और किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका स्पष्ट कहना है कि केवल निरीक्षण से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था करनी होगी।किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जलजमाव के कारणों की पहचान कर पानी निकासी के लिए ठोस योजना बनाई जाए।

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