



भागलपुर ।
भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल की अध्यक्षता में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की महत्वपूर्ण बैठक समीक्षा भवन, भागलपुर में आयोजित की गई। बैठक में जिले के समग्र विकास, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की प्रगति तथा जनसमस्याओं की समीक्षा की गई। बैठक की शुरुआत जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी द्वारा सांसद अजय कुमार मंडल का पौधा भेंट कर स्वागत करने के साथ हुई।

बैठक में सुल्तानगंज विधायक को अनुमंडल पदाधिकारी सदर, नाथनगर विधायक को डीआरडीए निदेशक तथा भागलपुर नगर निगम की महापौर को जिला परिवहन पदाधिकारी द्वारा पौधा देकर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त पीरपैंती विधायक एवं भागलपुर विधायक का स्वागत क्रमशः डीआरडीए निदेशक अमर कुमार मिश्रा एवं जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी सुधीर कुमार द्वारा पौधा भेंट कर किया गया।
बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़ी समस्याओं को विस्तार से रखा। भागलपुर नगर निगम की महापौर डॉ. वसुंधरा लाल ने समग्र शहरी विकास योजना में तेजी लाने, अमृत-2 योजना को शीघ्र प्रारंभ कराने तथा सी एंड डी वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग की। उन्होंने कहा कि योजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन से शहरवासियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी।
नाथनगर विधायक मिथुन कुमार ने बताया कि राजांदीपुर में उप-स्वास्थ्य केंद्र एक निजी भवन में संचालित हो रहा है, जिसकी स्थिति अत्यंत जर्जर है। उन्होंने इसे शीघ्र नए भवन में स्थानांतरित करने की आवश्यकता बताई। इस पर जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को उपयुक्त नए भवन की तलाश कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

जिला परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. प्रणय कुमार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए आवेदन की जटिल प्रक्रिया का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कई पात्र लोग अब तक आवेदन नहीं कर पाए हैं। इसके समाधान हेतु गांव-गांव में शिविर लगाकर आवेदन लेने की मांग की गई। साथ ही उन्होंने एनएच-80 पर बने सड़क के फ्लैंक को भरवाने की आवश्यकता बताई, जिससे दुर्घटनाओं पर रोक लग सके। उन्होंने डूब से मृत्यु के मामलों में लंबित मुआवजा भुगतान का भी मुद्दा उठाया। इस पर जिलाधिकारी ने सामाजिक सुरक्षा के सहायक निदेशक को जनवरी के दूसरे सप्ताह में प्रत्येक गांव में सामाजिक सुरक्षा आवेदन शिविर लगाने के निर्देश दिए।
सुल्तानगंज नगर परिषद के सभापति राजकुमार गुड्डू ने बताया कि सुल्तानगंज में 7.26 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा विद्युत शवदाह गृह विगत कई महीनों से बंद है, जिसे शीघ्र पूरा कराना आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने जर्जर अस्पताल दीवार के पुनर्निर्माण, एनएच-80 द्वारा छोड़े गए जलापूर्ति पाइप को भूमिगत कराने तथा आदर्श मध्य विद्यालय में अतिरिक्त वर्ग कक्ष निर्माण की मांग की।
बांका सांसद के प्रतिनिधि ने नगर परिषद की बैठकों में सांसद को आमंत्रित नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया और कहा कि इस संबंध में सरकार द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने सफाई बजट बढ़ने के बावजूद सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं होने, गंगा घाटों पर अतिरिक्त प्रतिनियुक्ति की आवश्यकता तथा मुरारका कॉलेज को बुडको द्वारा जलापूर्ति नहीं किए जाने की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।
भागलपुर विधायक रोहित पांडे ने शहरी क्षेत्र के मृत तालाबों को पुनर्जीवित करने, लोहिया पुल के नीचे मारवाड़ी पाठशाला के समीप फुटकर विक्रेताओं के लिए स्थायी स्थान उपलब्ध कराने तथा पुरानी धर्मशालाओं को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि धर्मशालाओं के पुनरुद्धार से आम लोगों को सस्ती दरों पर आवासन की सुविधा मिल सकेगी। साथ ही उन्होंने वृक्षारोपण कार्यक्रम में फलदार पौधों को प्राथमिकता देने की बात कही, जिससे किसानों को भी लाभ हो।
पीरपैंती विधायक मुरारी पासवान ने बताया कि क्षेत्र में दो पुल बह चुके हैं तथा तीन पुल जर्जर अवस्था में हैं। गंगा कटाव के कारण 800 से 900 लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनके पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पीरपैंती में स्थित आदिवासी छात्रावास कटाव की जद में है। इसके साथ ही मजदूरों के लिए गांव-गांव में शिविर लगाने, चिकित्सकों की अनियमित उपस्थिति तथा अल्ट्रासाउंड तकनीशियन की कमी का मुद्दा भी उठाया। जिलाधिकारी ने बिना कार्य किए वेतन लेने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश सिविल सर्जन को दिए।
बैठक में नगर पंचायत सबौर के प्रतिनिधियों ने भी अपनी समस्याएं रखीं। वहीं कहलगांव प्रखंड प्रमुख नूतन देवी ने पीरपैंती अंचलाधिकारी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई और मध्य विद्यालय नारायणपुर की मरम्मत की आवश्यकता बताई। उन्होंने अनुमंडलीय अस्पताल में कार्यरत एक नर्स पर अवैध वसूली का आरोप भी लगाया। इस पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश देते हुए संबंधित नर्स के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए। साथ ही स्थानांतरण के बाद भी अस्पताल में कार्यरत लिपिक के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश सिविल सर्जन को दिए गए।
बैठक में उर्वरक वितरण से जुड़ी कई शिकायतें भी सामने आईं। इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रखंडों के प्रमुखों ने अपनी-अपनी समस्याएं मौखिक एवं लिखित रूप में जिलाधिकारी को सौंपीं। जिलाधिकारी ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं का लाभ आम जनता तक सुनिश्चित रूप से पहुंच सके।














