



भागलपुर ।
जिला पदाधिकारी, भागलपुर की अध्यक्षता में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय सतर्कता एवं अनुश्रवण समिति की इस वर्ष की चौथी बैठक समीक्षा भवन, भागलपुर में आयोजित की गई। बैठक में अधिनियम के प्रावधानों के त्वरित, नियमानुकूल एवं अक्षरशः अनुपालन को लेकर विस्तृत समीक्षा एवं चर्चा की गई।

बैठक में जिला पदाधिकारी सह समिति अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिनियम के सभी प्रावधानों को ससमय, संवेदनशीलता के साथ एवं प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, ताकि पीड़ितों को शीघ्र न्याय एवं राहत सुनिश्चित हो सके।

बैठक में जानकारी दी गई कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस अधिनियम के अंतर्गत आवंटित राशि से अब तक 242 पीड़ितों एवं आश्रितों को मुआवजा राशि का लाभ प्रदान किया जा चुका है। इसी अवधि में अधिनियम के तहत जिले में कुल 196 मामले दर्ज किए गए हैं तथा सभी मामलों में जिला पदाधिकारी की स्वीकृति के उपरांत अधिनियम की धाराओं के अनुरूप अनुमान्य मुआवजा राशि का ससमय भुगतान किया गया है।
इसके अतिरिक्त एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत कुल 46 आश्रितों को अनुमान्य पेंशन राशि का प्रतिमाह नियमित भुगतान किया जा रहा है। नवंबर माह के दौरान दोनों पुलिस जिलों में इस अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय में विचाराधीन चार मामलों में अंतिम निर्णय सुनाया गया, जिसमें तीन अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा दिलाई गई।
बैठक में जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अधिनियम का दुरुपयोग किसी भी स्तर पर न हो तथा जांच पदाधिकारी संवेदनशीलता एवं निष्पक्षता के साथ मामलों की जांच सुनिश्चित करें। इस क्रम में उपस्थित एससी/एसटी एक्ट के नोडल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को निर्देशित किया गया कि अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के अनुसंधान कार्य का सतत एवं समयबद्ध अनुश्रवण किया जाए।

समिति अध्यक्ष द्वारा यह भी निर्देश दिया गया कि न्यायालय में आरोप पत्र समर्पण हेतु लंबित कुल 270 मामलों में पुलिस पदाधिकारी शीघ्रता से अनुसंधान कार्य पूर्ण कर आरोप पत्र समर्पित करना सुनिश्चित करें।
इसके साथ ही बैठक में उपस्थित दोनों एससी/एसटी एक्ट के नोडल अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी एवं विशेष लोक अभियोजक को निर्देशित किया गया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के अंतर्गत दर्ज जघन्य प्रकृति के मामलों में शीघ्र सुनवाई के लिए माननीय न्यायालय में स्पीडी ट्रायल संबंधी प्रस्ताव उपलब्ध कराने हेतु नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित की जाए।













