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प्रदीप विद्रोही

भागलपुर।भागलपुर का जर्दालू आम अब सिर्फ स्वाद और पहचान का सवाल नहीं, बल्कि विदेशी बाजारों में बिहार की ब्रांडिंग और किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं का भी बड़ा माध्यम बनता जा रहा है। जीआई टैग प्राप्त जर्दालू आम को विदेशों तक पहुंचाने की राह में मौसम, परिवहन, गुणवत्ता और बाजार से जुड़ी चुनौतियों को लेकर भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने लोकसभा में सवाल उठाया था। अब केंद्र सरकार के जवाब ने जर्दालू उत्पादकों और निर्यातकों के लिए कई अहम तस्वीरें साफ की हैं।

लोकसभा में प्रश्न संख्या 3788 के माध्यम से सांसद ने केंद्र सरकार से जर्दालू आम के निर्यात की स्थिति, मौसम के प्रभाव, विदेशी बाजारों की आवश्यकताओं, परिवहन सुविधाओं और किसानों को मिल रही सरकारी सहायता की जानकारी मांगी थी। 11 अगस्त को वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस संबंध में विस्तृत जवाब सदन में दिया।

सरकार के जवाब में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि अनियोजित गर्मी अथवा बारिश के कारण जर्दालू आम के निर्यात में बड़ी गिरावट या फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हुई है। इससे जर्दालू के निर्यात की संभावनाओं को लेकर किसानों और निर्यातकों को राहत मिल सकती है।

खाड़ी बाजार में आसान होगी राह:

जर्दालू आम के लिए खाड़ी देशों का बाजार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि GCC देशों में जर्दालू आम के निर्यात के लिए वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) अथवा विशेष हॉट वॉटर ट्रीटमेंट अनिवार्य नहीं है। हालांकि सामान्य फाइटोसैनिटरी यानी पौध स्वास्थ्य संबंधी निर्यात नियमों का पालन करना जरूरी है।

एक और राहत देने वाली जानकारी यह है कि सरकार को यूरोपीय संघ और खाड़ी देशों में जर्दालू आम में कीटनाशक अवशेष अथवा निर्यात नियमों के उल्लंघन से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। यानी गुणवत्ता के मोर्चे पर भी जर्दालू आम के लिए विदेशी बाजारों में संभावनाएं बनी हुई हैं।

पटना एयरपोर्ट बनेगा जर्दालू की विदेश यात्रा का अहम पड़ाव:

भागलपुर के बागानों से निकलने वाले जर्दालू आम को देश और विदेश के बाजारों तक सुरक्षित एवं तेजी से पहुंचाने में परिवहन व्यवस्था सबसे अहम कड़ी है। इसी दिशा में पटना एयरपोर्ट पर 21,900 मीट्रिक टन वार्षिक क्षमता वाला एयर कार्गो टर्मिनल और कोल्ड स्टोरेज सुविधा शुरू की गई है।

इस सुविधा का लाभ जर्दालू सहित अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात में भी मिल सकता है। तापमान नियंत्रित भंडारण और हवाई कार्गो की सुविधा से कम समय में आम को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की संभावना बढ़ेगी। इससे खासकर ऐसे फल उत्पादों को फायदा हो सकता है, जिनकी गुणवत्ता और कीमत समय के साथ तेजी से प्रभावित होती है।

अब जर्दालू सिर्फ बिहार की मंडी तक सीमित नहीं:

सरकार ने अपने जवाब में बताया है कि APEDA की Financial Assistance Scheme (FAS) के तहत भागलपुर के किसानों और निर्यातकों को बुनियादी ढांचे, गुणवत्ता सुधार और नए विदेशी बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए सहायता दी जा रही है।

सबसे खास बात यह है कि वर्ष 2026 में जीआई टैग प्राप्त जर्दालू आम की यूके और मिडिल ईस्ट के देशों के लिए ट्रायल तथा कमर्शियल शिपमेंट सफलतापूर्वक भेजी गई है। यह कदम भागलपुर के जर्दालू को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विदेशी बाजारों में जर्दालू की पहचान मजबूत करने के लिए प्रचार-प्रसार कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है, ताकि निर्यात के अनुरूप उत्पादन, गुणवत्ता और पैकेजिंग जैसी आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सके।

सांसद बोले – जर्दालू में भागलपुर की पहचान और किसान की कमाई दोनों:

सांसद अजय कुमार मंडल ने कहा कि जर्दालू आम केवल एक फल नहीं, बल्कि भागलपुर की सांस्कृतिक, भौगोलिक और आर्थिक पहचान है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की योजनाओं और सुविधाओं का वास्तविक लाभ जर्दालू उत्पादक किसानों तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘भागलपुर का जर्दालू आम हमारी सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान है। हमारा प्रयास है कि केंद्र सरकार की योजनाओं और सुविधाओं का सीधा लाभ भागलपुर के किसानों को मिले। जर्दालू आम को देश और दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने के साथ-साथ भागलपुर का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने के लिए हम लगातार प्रयास करते रहेंगे।’

अब असली चुनौती – बागान से एयरपोर्ट तक की दूरी:

सरकार की ओर से निर्यात सुविधाओं और विदेशी बाजारों को लेकर सकारात्मक जानकारी मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि भागलपुर के बागानों से जर्दालू को पटना एयरपोर्ट और अन्य लॉजिस्टिक केंद्रों तक तेजी, कम लागत और सुरक्षित तरीके से कैसे पहुंचाया जाए।

यदि कोल्ड-चेन, पैकेजिंग, परिवहन, किसानों की प्रशिक्षण व्यवस्था और निर्यातकों के बीच बेहतर समन्वय मजबूत होता है, तो जर्दालू आम की विदेशों में बढ़ती मांग का सीधा फायदा भागलपुर के बागवानों को मिल सकता है।

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