


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सीमित जमीन और संसाधनों के बावजूद यदि सोच नई हो तो खेती भी रोजगार और प्रेरणा का बड़ा माध्यम बन सकती है। इसका जीवंत उदाहरण भागलपुर जिले के गोराडीह प्रखंड अंतर्गत बड़हरी गांव के सीमांत किसान रंजन कुमार सुमन हैं, जिन्होंने आधुनिक कृषि यंत्रीकरण को अपनाकर न सिर्फ अपनी खेती को लाभकारी बनाया, बल्कि पूरे इलाके में तकनीक आधारित खेती की नई पहचान स्थापित की है।
कृषि विज्ञान केन्द्र, सबौर से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद रंजन कुमार सुमन ने फार्म मशीन बैंक की स्थापना की। आज उनके पास 60 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर, लेजर लैंड लेवलर, ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर, रेज्ड बेड प्लांटर, मल्टीक्रॉप जीरो टिलेज मशीन, ड्रम सीडर सहित कई आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध हैं। इन मशीनों के जरिए वे अपने क्षेत्र के किसानों को समय पर किराये पर कृषि सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
रंजन अपनी लगभग 5 एकड़ कृषि भूमि पर आधुनिक तकनीकों से खेती करते हैं। इसके साथ ही कृषि यंत्रों को किराये पर उपलब्ध कराकर वे हर वर्ष लगभग 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और खेती को उन्होंने लाभकारी व्यवसाय का रूप दे दिया है।
उनकी पहल का सबसे बड़ा प्रभाव यह रहा कि आसपास के कई किसानों ने भी आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग शुरू किया। समय की बचत, लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि जैसे लाभों को देखते हुए क्षेत्र में कृषि यंत्रीकरण तेजी से बढ़ा है। रंजन का फार्म मशीन बैंक आज छोटे और सीमांत किसानों के लिए आधुनिक खेती का भरोसेमंद केंद्र बन चुका है।
कृषि क्षेत्र में उनके नवाचार, उत्कृष्ट कार्य और किसानों के बीच तकनीक के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने उन्हें ‘उत्कृष्ट किसान’ सम्मान से सम्मानित किया है।
रंजन कुमार सुमन की सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और सकारात्मक सोच के साथ सीमित संसाधनों में भी खेती को आत्मनिर्भर और लाभकारी बनाया जा सकता है। उनकी कहानी आज उन किसानों के लिए प्रेरणा है जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नई तकनीकों को अपनाने का साहस रखते हैं।

















