


भागलपुर। लोकसभा में पेश जनविश्वास विधेयक पर चर्चा के दौरान खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा ने बिल का जोरदार समर्थन करते हुए इसे देश में प्रशासनिक सुधार और नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। यह विधेयक केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा सदन में प्रस्तुत किया गया था, जिसमें 78 विभिन्न कानूनों में संशोधन का प्रावधान किया गया है।

संसद में अपने संबोधन के दौरान सांसद राजेश वर्मा ने कहा कि जनविश्वास बिल औपनिवेशिक सोच से बने कठोर कानूनों की “गुलामी की जंजीरों” को तोड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे तकनीकी उल्लंघनों को आपराधिक मामलों में बदलने की पुरानी व्यवस्था समाप्त कर इसे दंडात्मक के बजाय सुधारात्मक बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि समिति के स्तर पर कई बैठकों में कानूनों की विस्तृत समीक्षा की गई और सर्वसम्मति से संशोधन तैयार किया गया। बिल के लागू होने से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ-साथ आम नागरिकों के ईज ऑफ लिविंग में भी सुधार होगा।

सांसद ने कहा कि किसानों, युवाओं, व्यापारियों और बुनकर समुदाय को इससे सीधा लाभ मिलेगा। पुराने कानूनों के तहत मामूली त्रुटियों पर जेल की सजा का प्रावधान था, जिसे समाप्त कर जुर्माना या चेतावनी तक सीमित किया जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कैटल ट्रेसपास एक्ट, अप्रेंटिस एक्ट, एपीडा एक्ट और हैंडलूम से जुड़े प्रावधानों में संशोधन से किसानों, उद्योगों और युवाओं को राहत मिलेगी तथा रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
भागलपुर के बुनकर समुदाय का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पहले आरक्षित वस्तु के निर्माण में गलती होने पर जेल का प्रावधान था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। इससे स्थानीय बुनकरों और लघु उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा।

सांसद वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में हजारों पुराने और जटिल कानूनों को समाप्त कर व्यापार और निवेश का वातावरण बेहतर बनाया गया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि जनविश्वास बिल लागू होने से देश में निवेश, रोजगार और उद्यमिता को नई गति मिलेगी तथा आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।













