


विक्रमशिला सेतु बंद होने से बढ़ा दबाव, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
नवगछिया : विक्रमशिला सेतु के बंद रहने के कारण गंगा पार आवागमन के लिए महादेवपुर घाट पर निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है। शनिवार की शाम घाट पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे नाव पर सवार होने को लेकर अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई।
जानकारी के अनुसार रविवार की छुट्टी से पहले बड़ी संख्या में लोग अपने कार्यस्थलों, शिक्षण संस्थानों और अन्य गंतव्यों तक पहुंचने के लिए महादेवपुर घाट पहुंचे थे। शाम होते-होते घाट पर यात्रियों की संख्या काफी बढ़ गई और नावों पर चढ़ने के लिए लंबी कतारें लग गईं।
प्रशासन द्वारा सुरक्षा कारणों से नाव संचालन के लिए शाम 5 बजे तक की समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूद शनिवार को महादेवपुर घाट से शाम 6:15 बजे तक नावों का परिचालन जारी रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी कई नावें यात्रियों को लेकर गंगा पार करती रहीं। इससे सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं।
इसी दौरान एक नाव तकनीकी खराबी के कारण गंगा नदी की बीच धारा में रुक गई। घटना की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ एवं आपदा मित्र टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया। टीम ने नाव पर सवार यात्रियों को सुरक्षित रखा तथा आवश्यक मरम्मत के बाद नाव को पुनः संचालन योग्य बनाया। समय रहते राहत दल की कार्रवाई से संभावित हादला टल गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद जलमार्ग ही लोगों के आवागमन का प्रमुख साधन बन गया है। इसके कारण घाटों पर यात्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी मरीजों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को हो रही है, जिन्हें प्रतिदिन गंगा पार करना पड़ता है।
घाट पर मौजूद यात्रियों ने बताया कि भीड़ के मुकाबले नावों की संख्या पर्याप्त नहीं होने के कारण लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। वहीं शाम के समय सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
शनिवार को घाट पर दिखी भारी भीड़ और निर्धारित समय के बाद भी जारी नाव संचालन ने सुरक्षा व्यवस्था एवं प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि प्रशासन का कहना है कि नाव संचालन सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कराया जा रहा है तथा यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने घाट पर अतिरिक्त निगरानी, नावों की संख्या बढ़ाने तथा निर्धारित समय सीमा का सख्ती से पालन कराने की मांग की है, ताकि यात्रियों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
















