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भागलपुर : पूर्वी बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मायागंज अस्पताल की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सड़क हादसे में घायल सात माह की गर्भवती महिला को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने के बजाय कथित तौर पर रेफर स्लिप लाने के लिए दूसरे अस्पताल भेज दिया गया। वहीं, सदर अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष रंजन ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए महिला का उपचार कराया, जिससे समय रहते उसे आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल सकी।

जानकारी के अनुसार अलीगंज निवासी रूपा देवी, जो सात माह की गर्भवती हैं, सड़क दुर्घटना में घायल हो गई थीं। परिजन उन्हें इलाज के लिए मायागंज अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल में पंजीकरण और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बावजूद महिला को तत्काल भर्ती नहीं किया गया और पहले सदर अस्पताल से रेफर स्लिप लाने को कहा गया।

घटना के दौरान दर्द से कराह रही गर्भवती महिला को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा जाता रहा। ऐसे संवेदनशील समय में, जब हर मिनट मरीज और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए महत्वपूर्ण होता है, अस्पताल की इस कार्यप्रणाली ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंभीर रूप से घायल गर्भवती महिला को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल उपचार क्यों नहीं दिया गया।

बाद में परिजन महिला को सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां मेडिकल ऑफिसर डॉ. आशीष रंजन ने बिना समय गंवाए उसका इलाज शुरू कराया। उनकी तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता के कारण महिला को समय पर चिकित्सा सहायता मिल सकी।

डॉ. आशीष रंजन ने कहा कि किसी भी गंभीर मरीज, विशेषकर गर्भवती महिला को कागजी प्रक्रियाओं के नाम पर अस्पतालों के बीच नहीं दौड़ाया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में मरीज की जान बचाना और तत्काल उपचार उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

एक ओर जहां मायागंज अस्पताल की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डॉ. आशीष रंजन की मानवीय पहल और कर्तव्यनिष्ठा की लोग खुलकर सराहना कर रहे हैं। यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था में संवेदनशीलता, जवाबदेही और मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।

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