


नवगछिया। आदर्श थाना क्षेत्र अंतर्गत डाक बंगला रेलवे फ्लाईओवर के समीप मंगलवार को हुए एक सड़क हादसे ने देखते ही देखते विवाद का रूप ले लिया। दो तेज रफ्तार बाइकों की आमने-सामने टक्कर के बाद एक टोटो भी उसकी चपेट में आ गया, जिससे कई लोग घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर मारपीट और फिर अस्पताल में हंगामे के कारण स्थिति काफी देर तक तनावपूर्ण बनी रही।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, चांदनगर का एक युवक अपने दो साथियों के साथ बाइक से मकनपुर चौक की ओर जा रहा था। उसी समय दूसरी बाइक रंगरा थाना क्षेत्र के भवानीपुर की ओर से मकनपुर की दिशा में आ रही थी। दोनों बाइकों की रफ्तार तेज होने के कारण आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पीछे से आ रही एक टोटो भी अनियंत्रित होकर उनसे टकरा गई। इस हादसे में बाइक सवारों के साथ-साथ टोटो में बैठे यात्रियों को भी चोटें आईं।
घायलों में रंगरा थाना क्षेत्र के भवानीपुर निवासी दुखो यादव के पुत्र कुंदन यादव, नवगछिया थाना क्षेत्र के धोबिनिया निवासी महेश्वरी यादव के पुत्र भवेश यादव, चांदनगर निवासी प्रहलाद मंडल के पुत्र राजा कुमार, योगेंद्र मंडल के पुत्र सौरव कुमार तथा मनियामोर निवासी वजीर मल्लिक के पुत्र फैजान मलिक शामिल हैं। सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से अनुमंडलीय अस्पताल नवगछिया पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। इनमें से तीन घायलों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया, जबकि अन्य का इलाज स्थानीय स्तर पर चल रहा है।
हादसे के तुरंत बाद स्थिति उस समय बिगड़ गई जब एक पक्ष ने दूसरे पर जानबूझकर टक्कर मारने का आरोप लगाते हुए मारपीट शुरू कर दी। देखते ही देखते दोनों पक्षों के लोग मौके पर जुट गए और विवाद बढ़ गया। बाद में दर्जनों की संख्या में परिजन अनुमंडलीय अस्पताल पहुंच गए, जहां माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

अस्पताल परिसर में करीब एक घंटे तक अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति बनी रही। इस दौरान घायलों के परिजन आपस में उलझने को तैयार दिखे। एक घायल युवक की मां और बहन समेत महिला परिजन रोते-बिलखते और चीखते-चिल्लाते नजर आईं, जिससे अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को कार्य करने में काफी कठिनाई हुई।
घटना की सूचना मिलते ही आदर्श थाना नवगछिया की पुलिस मौके पर पहुंची। दरोगा अजहर के नेतृत्व में पहुंचे पुलिस बल ने स्थिति को संभालते हुए दोनों पक्षों को समझाया-बुझाया और किसी तरह मामला शांत कराया। पुलिस की तत्परता से बड़ा विवाद टल गया, हालांकि लोगों में आक्रोश बना रहा।
अस्पताल प्रशासन के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण साबित हुई। सुरक्षा व्यवस्था केवल दो पुरुष गार्डों के भरोसे थी, जिससे भीड़ को नियंत्रित करने में दिक्कतें आईं। महिला गार्ड की अनुपस्थिति के कारण हालात संभालना और मुश्किल हो गया। चिकित्सक लगातार घायलों के इलाज में जुटे रहे, लेकिन भीड़ और शोर-शराबे के कारण उन्हें व्यवधान का सामना करना पड़ा।















