


@ पेंशनरों ने पहले विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों का घेराव कर कारण पूछने, फिर मुख्यमंत्री और कुलाधिपति से मिलने का निर्णय लिया। समाधान नहीं होने पर उच्च न्यायालय जाने की भी बात कही है।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। फरवरी की पेंशन से वंचित रहने और अगस्त का अनुदान रोके जाने से नाराज टीएमबीयू के पेंशनरों ने रविवार को ऑनलाइन बैठक कर आंदोलन की रणनीति तय की। टीएमबीयू पेंशनर संघर्ष मंच के संयोजक पवन कुमार सिंह के संचालन में हुई बैठक में करीब तीन दर्जन पेंशनरों ने भाग लिया।
पेंशनरों ने आरोप लगाया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों से टीएमबीयू के पेंशनरों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना है कि उपयोगिता प्रमाण पत्र के मुद्दे पर दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक पेंशन मद की राशि जारी नहीं की गई थी। बाद में आंतरिक स्रोत से दो माह की पेंशन दी गई, लेकिन फरवरी का भुगतान अटक गया।
पेंशनरों के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के 14 अगस्त 2026 के पत्र में अन्य विश्वविद्यालयों को जून से अगस्त तक वेतन-पेंशन मद की राशि जारी की गई, लेकिन टीएमबीयू के पेंशनरों के लिए अगस्त का अनुदान नहीं दिया गया।

बैठक में सवाल उठाया गया कि यदि उपयोगिता प्रमाण पत्र के कारण राशि रोकी गई है तो विश्वविद्यालय के कार्यरत शिक्षकों-कर्मचारियों का वेतन कैसे जारी हो रहा है। सदस्यों ने कहा कि यदि किसी अधिकारी की गलती है तो उसकी सजा वरिष्ठ नागरिकों को क्यों दी जाए!
पेंशनरों ने पहले विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों का घेराव कर कारण पूछने, फिर मुख्यमंत्री और कुलाधिपति से मिलने का निर्णय लिया। समाधान नहीं होने पर उच्च न्यायालय जाने की भी बात कही है।
कुलपति से मुलाकात नहीं होने पर भी नाराजगी जताई गई। पेंशनरों ने एक बार फिर मिलने का समय मांगने और समय नहीं मिलने पर कुलपति कक्ष के सामने धरना देने की चेतावनी दी।
















