
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने की घोषणा, अगले वर्ष से राजकीय सूची में शामिल करने की योजना; लोक कलाकारों को मिलेगा मंच, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की तैयारी
पूर्णिया। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा है कि पूर्णिया के ततमा टोली स्थित श्री राम जानकी गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी के भव्य दुर्गा पूजा मेले को राजकीय पहचान दिलाने की योजना है। अगले वर्ष से मेले को राजकीय सूची में शामिल करने की प्रस्तावित पहल से इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बुधवार को पूर्णिया जिला भाजपा कार्यालय, वनभाग में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी का दुर्गा पूजा मेला क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सद्भाव का महत्वपूर्ण प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना करते हैं।

अगले वर्ष से राजकीय सूची में शामिल करने की योजना
मंत्री ने बताया कि मेले को राजकीय पहचान दिलाने की योजना का उद्देश्य इसे व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना और आयोजन को अधिक भव्य एवं व्यवस्थित स्वरूप प्रदान करना है। राजकीय स्तर पर पहचान मिलने से मेले के विकास और बेहतर आयोजन की दिशा में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
देश के प्रसिद्ध ग्रामीण कलाकारों को बुलाने की योजना
प्रस्तावित योजना के तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध ग्रामीण कलाकारों को आमंत्रित कर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की परिकल्पना की गई है। इससे लोककला, लोकसंगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही स्थानीय कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सकेगा।
धार्मिक पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिलेगा बढ़ावा

मेले के विस्तार से पूर्णिया में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से स्थानीय दुकानदारों, छोटे व्यवसायियों और अन्य कारोबारियों को भी लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और आयोजन स्थल पर बेहतर व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
मंत्री ने कहा कि श्री राम जानकी गोकुल सिंह ठाकुरबाड़ी का दुर्गा पूजा मेला आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। इसे राजकीय पहचान दिलाने की प्रस्तावित पहल से पूर्णिया की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच मिलने और क्षेत्र की पहचान मजबूत होने की उम्मीद है।
हालांकि, मेले को राजकीय सूची में शामिल करने की प्रक्रिया और इससे संबंधित औपचारिक निर्णयों की विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।















