


पूर्णिया। पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले संबद्ध (एफिलिएटेड) कॉलेजों के शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों ने वर्षों से लंबित वेतन एवं अन्य बकाया राशि के भुगतान की मांग को लेकर मंगलवार को विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। धरने में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार से लंबित भुगतान को लेकर तत्काल पहल करने की मांग की।

धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने कहा कि पिछले कई वर्षों से उन्हें नियमित रूप से वेतन नहीं मिल पा रहा है। लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी खर्च और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है।
शिक्षकों और कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अपनी समस्याओं को लेकर वे कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन का ध्यान आकृष्ट करा चुके हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में अपेक्षित ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक वेतन एवं बकाया राशि का भुगतान नहीं होना कर्मचारियों के प्रति गंभीर उदासीनता को दर्शाता है।
2018 से प्रायोगिक परीक्षा की मजदूरी भी लंबित
धरना-प्रदर्शन के दौरान वर्ष 2018 से आयोजित प्रायोगिक परीक्षाओं की मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित प्रायोगिक परीक्षाओं में शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई, लेकिन लंबे समय बाद भी उन्हें संबंधित मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है।
शिक्षकों ने कहा कि परीक्षा कार्य के बदले मिलने वाली राशि भी वर्षों से लंबित है। उन्होंने इसे अपने श्रम और सेवाओं की अनदेखी बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जल्द से जल्द भुगतान करने की मांग की।
मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज
धरना स्थल पर वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मामले को राज्य सरकार के समक्ष भी जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि उन्हें वर्षों तक उनके वेतन और मेहनत की राशि के लिए संघर्ष करना पड़े, तो इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए लंबित भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने की मांग की।

राजद नेता पीयूष पुजारा ने दिया समर्थन
धरना-प्रदर्शन को समर्थन देने पहुंचे राजद नेता एवं पूर्णिया विश्वविद्यालय अध्यक्ष पीयूष पुजारा ने भी शिक्षकों और कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनका अधिकार नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर लंबित वेतन एवं अन्य बकाया राशि के भुगतान की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
पीयूष पुजारा ने कहा कि “शिक्षक और कर्मचारी किसी भी संस्थान की रीढ़ होते हैं। यदि उन्हें समय पर वेतन और उनके श्रम का उचित सम्मान नहीं मिलेगा, तो शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी। पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए और अविलंब बकाया भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि विश्वविद्यालय स्तर पर इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इस मुद्दे को बिहार विधानसभा तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कहा कि “विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार को इस मुद्दे पर घेरने का काम किया जाएगा। यह केवल शिक्षकों और कर्मचारियों का मामला नहीं है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र से जुड़ा गंभीर सवाल है।”
धरना-प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन से वर्षों से लंबित वेतन तथा प्रायोगिक परीक्षा की मजदूरी सहित अन्य बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
















