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पूर्णिया । पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया के एसएसएआई (सोशलिस्ट स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया) सह छात्र राजद के अध्यक्ष पीयूष पुजारा ने विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों के विरोध में 30 मई से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के साथ आर्थिक शोषण और दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

पीयूष पुजारा ने बयान जारी करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से छात्र लगातार यह मांग कर रहे हैं कि स्नातक नामांकन आवेदन के लिए लिए जा रहे शुल्क में राहत दी जाए। उनका आरोप है कि पूर्णिया विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक नामांकन आवेदन के नाम पर सीमांचल के छात्रों से 600 रुपये तक की राशि वसूली जा रही है, जो पूरी तरह अनुचित और अवैध उगाही जैसी है।

उन्होंने कहा कि पूर्णिया विश्वविद्यालय में एक वर्ष पूर्व ही “समर्थ पोर्टल” लागू किया गया है, जो भारत सरकार की व्यवस्था का हिस्सा है। इस पोर्टल के उपयोग के लिए विश्वविद्यालय को किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना पड़ता। इसके बावजूद छात्रों से अत्यधिक राशि वसूली जा रही है।

पीयूष पुजारा ने कहा कि यदि आसपास के विश्वविद्यालयों की तुलना की जाए तो मधेपुरा विश्वविद्यालय में नामांकन आवेदन के लिए लगभग 150 रुपये तथा भागलपुर विश्वविद्यालय में करीब 200 रुपये शुल्क लिया जाता है। ऐसे में सीमांचल जैसे आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्र के छात्रों से 600 रुपये लेना विश्वविद्यालय प्रशासन की “हिटलरशाही” मानसिकता को दर्शाता है।

उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के हितों की अनदेखी कर रहा है। उनका कहना था कि छात्रों की समस्याओं और आर्थिक स्थिति की कोई चिंता नहीं की जा रही है।

पीयूष पुजारा ने कहा कि छात्रों के हितों की रक्षा के लिए अब आंदोलन का रास्ता अपनाना मजबूरी बन गया है। उन्होंने घोषणा की कि 30 मई से गांधीवादी तरीके से पूर्णिया विश्वविद्यालय के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के पक्ष में फैसला लेकर आवेदन शुल्क में राहत नहीं देता, तब तक यह अनशन जारी रहेगा।

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