


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। भागलपुर जिले के राघोपुर में गंगा का कटाव लगातार चुनौती बना हुआ है। नदी की तेज और बदलती धारा के कारण काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल तटबंध का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। तटबंध को बचाने और कटाव की रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए जल संसाधन विभाग और प्रशासन की ओर से बचाव कार्य तेज कर दिया गया है। अब नदी की मुख्य धारा को मोड़ने के लिए ड्रेजिंग मशीन लगाने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य नदी की धारा का दबाव तटबंध से हटाना और क्षतिग्रस्त हिस्से में मरम्मत कार्य के लिए अनुकूल स्थिति तैयार करना है।प्रशासन की कोशिश है कि नदी की धारा का दबाव कम होने के बाद क्षतिग्रस्त तटबंध को मजबूत किया जाए और आसपास के इलाकों में बाढ़ के खतरे को नियंत्रित किया जा सके। फिलहाल राघोपुर में राहत, बचाव और तटबंध सुरक्षा का काम युद्धस्तर पर जारी है।

राघोपुर क्षेत्र में गंगा की धारा के लगातार तट की ओर आने से कटाव का दायरा बढ़ता गया है। नदी के बीच बने रेत के शोल के कारण पानी की दिशा प्रभावित होने और उसका दबाव तटबंध की ओर बढ़ने की बात सामने आई है। तेज बहाव के बीच तटबंध की मरम्मत करना भी आसान नहीं है। यही वजह है कि अब सिर्फ टूटे हिस्से को भरने के बजाय नदी की धारा के दबाव को कम करने की रणनीति पर जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यदि नदी का सीधा दबाव क्षतिग्रस्त तटबंध से कम किया जा सका तो बचाव दल को मरम्मत और सुरक्षा कार्य करने में मदद मिलेगी। तटबंध को तत्काल सुरक्षित करने के लिए अन्य तकनीकी उपायों पर भी काम जारी है। मुख्य अभियंता की ओर से शीट पाइलिंग को भी मजबूत बचाव उपाय बताया गया है।
बालू की बोरियों और भारी मशीनरी से बचाव कार्य
कटाव को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित हिस्से में बालू से भरी बोरियां डाली जा रही हैं। पहले से ही बड़ी संख्या में मजदूर, नाव और भारी मशीनरी बचाव अभियान में लगाए गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 250 श्रमिकों के साथ नावों, ट्रैक्टर, पोकलेन और जेसीबी की मदद से दिन-रात काम कराया जा रहा है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज जलदाब के बीच काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल तटबंध का हिस्सा अगस्त के अंतिम सप्ताह में टूट गया था। इसके बाद राघोपुर पंचायत और आसपास के इलाकों में पानी फैलने से स्थिति गंभीर हो गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बढ़ाई और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।
बाद की रिपोर्टों में तटबंध के कटाव के लगातार बढ़ने की बात सामने आई। स्थानीय लोगों और विभागीय अधिकारियों के आंकड़ों में अंतर जरूर रहा, लेकिन इस बात पर सहमति रही कि नदी का कटाव लगातार चुनौती बना हुआ है।

राघोपुर में मौजूदा स्थिति में सबसे बड़ी चुनौती तटबंध की मरम्मत से पहले गंगा की तेज धारा के दबाव को नियंत्रित करना है। यदि नदी का बहाव लगातार क्षतिग्रस्त हिस्से पर दबाव डालता रहा तो मरम्मत कार्य को टिकाऊ बनाना मुश्किल होगा। ऐसे में ड्रेजिंग मशीन के जरिए धारा को मोड़ने की तैयारी को बचाव अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।















