5
(1)

मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर भाजपा नेता ने जताया दुख, कहा— वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत कटुता में नहीं बदलना चाहिए

पूर्णिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर दिए गए कथित विवादित बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए दुख और खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखना सभी वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी है।

CREATOR: gd-jpeg v1.0 (using IJG JPEG v62), default quality?

प्रेस को जारी बयान में डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह देश की दशा और दिशा निर्धारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में राजनीतिक जीवन में सक्रिय वरिष्ठ नेताओं का दायित्व है कि वे अपने आचरण, भाषा और वक्तव्यों से समाज के सामने बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करें।

उन्होंने कहा कि युवा और नई पीढ़ी राजनीति में आने वाले नेताओं के व्यवहार और कार्यशैली से सीखती है। इसलिए वरिष्ठ नेतृत्व को अपने सार्वजनिक वक्तव्यों में शालीनता, पारदर्शिता और मर्यादा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें व्यक्तिगत कटुता और अमर्यादित टिप्पणी का रूप नहीं लेना चाहिए।

अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक शैली का किया उल्लेख

भाजपा नेता ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वैचारिक मतभेदों के बावजूद संवाद और शालीनता की परंपरा को महत्व दिया। उनकी राजनीतिक शैली पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए प्रेरणास्रोत रही है।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने वक्तव्यों में राजनीतिक गरिमा का ध्यान रखें। सार्वजनिक जीवन में ऐसी भाषा से बचना चाहिए, जिससे राजनीति के स्तर और सामाजिक संवाद पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

लोकतंत्र की गरिमा बनाए रखने की अपील

डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की कि वे लोकतंत्र की गरिमा को सर्वोपरि रखें। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों और नीतियों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन विरोध की अभिव्यक्ति शालीन और मर्यादित तरीके से होनी चाहिए।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं के आचरण का प्रभाव केवल वर्तमान राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की राजनीतिक सोच और कार्यशैली पर भी पड़ता है। इसलिए सभी दलों के नेताओं को अपने सार्वजनिक बयानों में संयम और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।

Aapko Yah News Kaise Laga.

Click on a star to rate it!

Average rating 5 / 5. Vote count: 1

No votes so far! Be the first to rate this post.

Share: