
@ नितिन नवीन के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने को लेकर जिला भाजपा पर उठे सवाल, वायरल वीडियो से जिलाध्यक्ष संतोष साह और विधायक रोहित पांडे की कार्यशैली चर्चा में।
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। चुनाव में सातों विधानसभा सीटों पर जीत का जश्न और संगठन की मजबूती का दावा करने वाली भाजपा की भागलपुर इकाई अब अपने ही कार्यकर्ता के सवालों से घिरती नजर आ रही है। मौका था राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लाजपत पार्क स्थित कार्यक्रम का, लेकिन इस आयोजन में जनभागीदारी को लेकर उठे सवालों ने जिला संगठन की तैयारियों पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।

हैरानी की बात यह है कि सवाल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि भाजपा के अपने कार्यकर्ता की ओर से उठाए गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में संगठन की सक्रियता और जिलाध्यक्ष संतोष साह के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। साथ ही भागलपुर सदर सीट के विधायक रोहित पांडे की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इससे पार्टी के अंदरखाने की नाराजगी भी चर्चा में आ गई है।
इन आरोपों से इतर जिला भाजपा के अंदरखाने से छनकर बाहर आ रही खबरें और भी चौंकाने वाली हैं। बताया जाता है कि कार्यक्रम में भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी प्रदेश स्तर की एक स्थानीय महिला नेत्री समेत कुल चार बड़े चेहरों को सौंपी गई थी। आरोप है कि इन लोगों ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। बताया जाता है कि सभी अपने-अपने क्षेत्र के कार्यकर्ताओं को निमंत्रण देकर बाद में सक्रिय नहीं रहे। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी संभालने वाले नेताओं ने आखिर अपनी जवाबदेही कितनी निभाई?
चर्चा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी। यहां तक कि एक से दो हजार लोगों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, भीड़ के आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन कार्यक्रम के वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे दृश्य जनभागीदारी को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भाजपा भागलपुर की सातों सीटों पर जीत को अपनी संगठनात्मक ताकत का प्रमाण बता रही है, तो बड़े नेताओं के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भागीदारी कमजोर क्यों नजर आ रही है?

एक तरफ भाजपा राहुल गांधी की रामलीला मैदान में हुई रैली को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही कार्यक्रमों में जनभागीदारी को लेकर उठते सवाल संगठन की कार्यशैली पर बहस छेड़ रहे हैं। विपक्ष की भीड़ और राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाने वाले नेताओं को अपने आयोजनों की सफलता का हिसाब भी देना होगा।
राजनीति में विधानसभा सीटों की जीत ही संगठन की असली ताकत नहीं होती। कार्यकर्ताओं का उत्साह, जनता की भागीदारी और बड़े आयोजनों को सफल बनाने की क्षमता भी संगठन की परीक्षा होती है।अब निगाहें जिलाध्यक्ष संतोष साह और विधायक रोहित पांडे पर हैं। वायरल वीडियो में उठे सवालों पर जिला नेतृत्व क्या जवाब देता है? क्या संगठन अपनी तैयारियों और कार्यशैली की समीक्षा करेगा या फिर इन सवालों को महज एक कार्यकर्ता की नाराजगी मानकर किनारे कर दिया जाएगा?















