


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। बाढ़ और कटाव से जूझ रहे रघोपुर में शुक्रवार को विकास की एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने सरकारी इंतजामों और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए। कटाव स्थल पर आधी रात से ही काम बंद रहने का दावा करते हुए एक युवक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लाइव वीडियो प्रसारित किया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर दिनभर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। इस तरह की शिकायत पूर्व में भी सामने आ चुकी है। बताया गया कि वायरल वीडियो के बाद दोपहर में मंत्री ई शैलेन्द्र के कार्य स्थल पर पहुंचने की सूचना है।

वीडियो में युवक स्थानीय लहजे में कथित तौर पर मंत्री शैलेन्द्र बाबू और सांसद अजय बाबू को संबोधित करते हुए कहता नजर आ रहा है – ‘शैलेन्द्र बाबू, अजय बाबू, देखो रात से ही काम बंद छै… अभी दिन के 11 बज रहल छै… एहना काम होते तऽ सब कटि जैतै, सब करलो-धरलो बेकार हो जैतै… आबो ध्यान दऽहो।’
युवक की यह गुहार सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। वीडियो में कटाव स्थल पर कथित रूप से मजदूरों की अनुपस्थिति और बंद पड़े काम को दिखाने का प्रयास किया गया है। दावा किया गया कि बीती रात एक बजे से शुक्रवार की सुबह करीब 11 बजे तक भी कामकाज की स्थिति संतोषजनक नहीं थी। मौके पर एक-दो मजदूर ही काम करते दिखाई दिए।
कटाव तेज, काम धीमा – किसका इंतजार:
मालूम हो कि रघोपुर में गंगा का रौद्र रूप विकराल हो चुका है। बांध के कटने के बाद अब गंगा पुराने रेलवे बांध को भी लीलने पर आतुर है। इसे बचाने की कवायद युद्ध स्तर पर जारी है। अगर इसे नहीं बचाया गया, तो प्रलय की घंटी घनघनाने लगेगी। सांसद, मंत्री और अधिकारियों की नींद हराम हो उठेगी। इधर, ग्रामीणों का गुस्सा आसमान पर है। गंगा की कोख में कई घर समा चुके हैं। ग्रामीण अपना आशियाना छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भाग रहे हैं। ऐसे में थोड़ी-सी शिथिलता भी पल भर में कहर बनकर टूट सकती है।
कटाव की भयावहता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर 24 घंटे बचाव कार्य जारी रखने का निर्देश दिया गया है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने एक अलग ही तस्वीर पेश की है। सवाल यह उठ रहा है कि जब कटाव स्थल पर लगातार निगरानी और बचाव कार्य की जरूरत है, तब रात से काम बंद रहने की स्थिति कैसे बनी।

मंत्री-सांसद का नाम लेकर युवक ने लगाई गुहार:
वीडियो में युवक ने सीधे तौर पर मंत्री और सांसद का नाम लेकर उनसे मामले पर ध्यान देने की अपील की। उसका कहना है कि यदि इसी तरह काम चलता रहा, तो अब तक किए गए तमाम प्रयास बेकार हो सकते हैं और कटाव से बड़ी क्षति हो सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या मौके पर नियमित निगरानी हो रही है? क्या संबंधित अधिकारी स्थिति का जायजा ले रहे हैं? और यदि काम रात से बंद था, तो उसे दोबारा शुरू कराने में इतनी देर क्यों हुई?
यदि वायरल वीडियो में किए गए दावे सही हैं, तो संबंधित विभाग और प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कटाव स्थल पर काम कब से बंद था, क्यों बंद था, कितने मजदूर लगाए गए थे और शुक्रवार की सुबह तक काम की वास्तविक स्थिति क्या थी।
फिलहाल वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। वीडियो में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले पर संज्ञान लेता है या फिर नदी के कटाव के साथ-साथ सवालों का कटाव भी जारी रहता है।
















