


ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के आवास के समीप 21 दिवसीय आंदोलन, वर्षों की उपेक्षा पर फूटा लोगों का गुस्सा
नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर प्रखंड अंतर्गत कांटीधार नवटोलिया एवं डीमहा गांव के ग्रामीणों का वर्षों पुराना आक्रोश अब सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगा है। सड़क, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने जदयू विधायक सह बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के आवास के समीप 21 दिवसीय आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2007 से लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र से मंत्री बनने के बावजूद गांव की तस्वीर नहीं बदली और ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
पोस्टर में झलका गांव का दर्द
अनशन स्थल पर लगाए गए बड़े-बड़े पोस्टरों में गांव की बदहाली को मार्मिक ढंग से दर्शाया गया है। पोस्टर में लिखा गया है कि सड़क नहीं रहने के कारण गर्भवती महिलाओं को कीचड़ और खेतों के रास्ते अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया कि स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर गंगा नदी पार कर पढ़ाई करने जाते हैं। कई बार बीमार और घायल लोगों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, जिससे उनकी जान तक चली गई।
शादी-विवाह भी हो रहे प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और आवागमन की सुविधा नहीं होने के कारण शादी-विवाह जैसे सामाजिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। गांव में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया।
प्रदर्शन स्थल पर लगे पोस्टरों में “आजाद भारत का गुलाम गांव” जैसे नारे लिखकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला गया है।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
आमरण अनशन पर बैठे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आंदोलन स्थल पर लगातार नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था और आवागमन की समुचित सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन और सरकार इस गंभीर जनसमस्या पर कब तक संज्ञान लेते हैं और वर्षों से उपेक्षित इन गांवों को राहत मिल पाती है या नहीं।
















