


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। सावन के पवित्र महीने का ‘सिंह एतवार’ रविवार को गंगा तटों पर आस्था, ममता और संकल्प का अद्भुत संगम बन गया। सुबह होते ही भागलपुर के विभिन्न गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। गंगा के तट पर तो ऐसा दृश्य दिखाई दिया, मानो मां गंगा की गोद में पूरा शहर अपनी मनोकामना लेकर पहुंच गया हो।

सबसे खास नजारा उन सैकड़ों पुत्रवती महिलाओं का था, जो अपने पुत्रों के कल्याण, कुशलता और दीर्घायु की कामना लेकर गंगा स्नान करने पहुंचीं। श्रद्धा के साथ महिलाओं ने गंगा की पवित्र धारा में डुबकी लगाई और इसके बाद गंगा तट पर ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने व्रत का शुभारंभ किया।
यहां स्नान सिर्फ परंपरा नहीं, मां की मन्नत है:
सिंह एतवार की सबसे मार्मिक तस्वीर उन माताओं के चेहरों पर दिखाई दी, जिनकी प्रार्थना का केंद्र उनका पुत्र था। किसी मां की जुबान पर बेटे की लंबी उम्र की कामना थी तो कोई उसके सुख, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए मां गंगा से आशीर्वाद मांग रही थी। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पुत्रवती महिलाएं गंगा स्नान के बाद गंगा तट पर पूजा-अर्चना करती हैं और अपने पुत्र के कल्याण की कामना करती हैं। यही वजह है कि सुबह से ही गंगा घाटों पर महिलाओं की भीड़ बढ़ती चली गई।
गंगा किनारे ही पूजा और फलाहार:
पंडित निलेश शास्त्री ने बताया कि सावन में सिंह एतवार का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन पुत्रवती महिलाएं सबसे पहले गंगा स्नान करती हैं। इसके बाद गंगा तट पर ही अपने पुत्र के कल्याण, कुशलता और दीर्घायु के लिए पूजा-अर्चना करती हैं।
उन्होंने बताया कि इस व्रत में गर्म भोजन करना वर्जित माना गया है। व्रती महिलाएं गंगा तट पर ही फलाहार करती हैं और दिनभर व्रत का पालन करती हैं। इस कारण कई महिलाएं सुबह से ही फल, प्रसाद और पूजा की सामग्री लेकर घाट पर पहुंची थीं।
झारखंड के गांवों से भी पहुंचा आस्था का कारवां
कहलगांव और भागलपुर के आसपास के इलाकों के साथ-साथ झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं गंगा स्नान के लिए पहुंचे। सुबह से ही विभिन्न रास्तों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।

भीड़ बढ़ी तो प्रशासन भी रहा सतर्क:
सिंह एतवार को उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से गंगा घाटों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की टीमों को सतर्क रखा गया।
मां गंगा के तट पर एक दिन, बेटे की लंबी उम्र के नाम:
सिंह एतवार का यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं दिखा। गंगा तट पर उमड़ी माताओं की भीड़ ने इसे ममता और आस्था के मिलन का पर्व बना दिया। सुबह की पहली किरण से लेकर दिन चढ़ने तक गंगा घाट पर एक ही भाव बार-बार दिखाई दिया – मां की प्रार्थना अपने लिए नहीं, अपने बेटे के लिए।
गंगा की लहरें बहती रहीं, पूजा के दीप जलते रहे और माताओं की जुबान पर अपने पुत्रों की सलामती की कामना बनी रही।
















