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प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। देश-दुनिया में अपनी रेशमी पहचान रखने वाले भागलपुर के सिल्क उद्योग के लिए आने वाले दिनों में नई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं। सांसद अजय कुमार मंडल द्वारा संसद में उठाए गए सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने भागलपुर के तसर सिल्क, हथकरघा उद्योग और बुनकरों के विकास को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की हैं। इससे न सिर्फ स्थानीय बुनकरों में उम्मीद जगी है, बल्कि सिल्क उद्योग को नई दिशा मिलने की संभावना भी बढ़ गई है।

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सांसद अजय कुमार मंडल ने बताया कि उन्होंने संसद में सिल्क उद्योग, हथकरघा क्षेत्र, बुनकरों के कल्याण और प्रस्तावित मेगा टेक्सटाइल पार्क का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। वस्त्र मंत्रालय से मिले जवाब में स्पष्ट किया गया है कि भागलपुर में हथकरघा उद्योग को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है और भविष्य में भी नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
केंद्र सरकार की ओर से भागलपुर में 5.28 करोड़ रुपये की लागत से मेगा हथकरघा क्लस्टर विकसित किया गया है। इस परियोजना के तहत आधुनिक डाई हाउस, डिजाइन स्टूडियो, उत्पाद विकास केंद्र और 10 ब्लॉक स्तरीय क्लस्टर स्थापित किए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य बुनकरों को आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि उनके उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बन सकें।
सांसद ने बताया कि वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में नए मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने की घोषणा की गई है। योजना के दिशा-निर्देश जारी होने के बाद राज्यों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि भागलपुर में मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना के लिए वे केंद्र सरकार के समक्ष लगातार मजबूत पैरवी करेंगे। उनका मानना है कि यदि यह परियोजना भागलपुर को मिलती है तो इससे रोजगार, निवेश और सिल्क उद्योग को व्यापक बढ़ावा मिलेगा।
बदलते बाजार को देखते हुए बुनकरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में भी पहल की गई है। अब भागलपुर के बुनकर अपने उत्पादों की बिक्री IndiaHandmade पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं। साथ ही उन्हें गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) से भी जोड़ा जा रहा है, जिससे वे सीधे सरकारी विभागों और देश-विदेश के खरीदारों तक अपनी पहुंच बना सकें।
आर्थिक सहायता के क्षेत्र में भी बुनकरों को लाभ मिला है। बुनकर मुद्रा योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 32 बुनकरों को 23.90 लाख रुपये तथा वर्ष 2025-26 में 7 बुनकरों को 8.50 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया। इससे छोटे बुनकरों को अपने व्यवसाय के विस्तार और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सांसद अजय कुमार मंडल ने कहा कि भागलपुर का तसर सिल्क और हथकरघा उद्योग केवल व्यापार नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। उनका लक्ष्य है कि बुनकरों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और पर्याप्त आर्थिक सहयोग मिले, ताकि भागलपुर का सिल्क उद्योग वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत पहचान स्थापित कर सके।
सिल्क सिटी के बुनकरों की नजर अब केंद्र सरकार की अगली पहल और मेगा टेक्सटाइल पार्क की घोषणा पर टिकी है। यदि यह परियोजना भागलपुर को मिलती है, तो इसे जिले के वस्त्र उद्योग के इतिहास में एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।

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