


प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। आस्था, समर्पण और निस्वार्थ भावना जब एक साथ जुड़ जाएं तो वह मिसाल बन जाती है। भागलपुर स्थित घोघा की बहू रिंकी देवी ऐसी ही प्रेरणादायी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं की बजाय महिला खिलाड़ियों की सफलता को अपनी सबसे बड़ी कामना बना लिया है। पिछले 14 वर्षों से लगातार प्रत्येक सोमवारी डाक बम यात्रा कर वे भगवान भोलेनाथ से अपनी महिला खेल टीम के उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना कर रही हैं।
रिंकी कहती है चार मार्च 2011 को घोघा में महिला खेल टीम की स्थापना की गई थी। उसी समय उन्होंने यह संकल्प लिया कि जब तक उनका स्वास्थ्य साथ देगा, वे सावन माह में सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी पवित्र गंगा का जल लेकर प्रत्येक सोमवारी डाक बम यात्रा कर टीम की सफलता के लिए जलाभिषेक करती रहेंगी। उनका कहना है कि उन्होंने कभी अपने लिए धन, वैभव या व्यक्तिगत समृद्धि की कामना नहीं की। उनकी एकमात्र इच्छा है कि उनकी टीम राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाए और लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रहे। यह मनोकामना वर्षों से दिख भी रहा है। घोघा की कई बेटियों ने वॉलीबॉल और कबड्डी में देश स्तर पर खूब नाम भी कमाया है।
रिंकी का मानना है कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि बेटियों को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सशक्त बनाने का सबसे प्रभावी रास्ता है। यही सोच उन्हें वर्षों से अपनी आस्था और संकल्प पर अडिग रखे हुए है।
घोघा और आसपास के क्षेत्र में रिंकी का यह समर्पण लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बन गया है। स्थानीय लोग उनकी निस्वार्थ भावना की सराहना करते हैं और मानते हैं कि समाज में ऐसे उदाहरण बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा देते हैं।
एक ओर जहां लोग धार्मिक यात्राएं अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं की पूर्ति के लिए करते हैं, वहीं रिकी ने अपनी आस्था को समाज और महिला खिलाड़ियों के भविष्य से जोड़ दिया है। उनका यह 14 वर्षों का अटूट संकल्प न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और खेलों के प्रति उनके समर्पण की भी अनूठी मिसाल है।
















