
प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। जिले के कहलगांव शहर में स्थापित किला वाली मातारानी पिछले 150 वर्षों से विराजमान हैं। यहां मां की पूजा-अर्चना बांग्ला पद्धति से होती है। स्थापना से पहले, मंदिर निर्माण के लिए जमींदार विद्युत गांगुली ने भूमि प्रदान की थी। उसके बाद, पिंडी पर पूजा शुरू हुई। कुछ वर्षों बाद जमींदार के प्रिय राय बहादुर गजाधर प्रसाद साह ने मंदिर का निर्माण कराया। दशहरे के अवसर पर यहां की दो दिवसीय नाट्य परंपरा की चर्चा पूरे जिले में होती थी। मंदिर परिसर में जेपी ड्रामेटिक स्टेज हुआ करता था, जहां प्रारंभिक दौर में बाल नाट्य परिषद पश्चात विद्यार्थी परिषद के रंगकर्मियों द्वारा ‘कफन’ और ‘दो बीघा जमीन’ जैसे सामाजिक नाटकों का मंचन भोर तक होता था। नाटक टीम को मंदिर कमेटी के द्वारा महज तीस रू मिला करता था। दूर दराज से आए ग्रामीण दर्शक रंगमंच को घेरे रहते थे। प्रथम पर्दा उठने में देरी होने से दर्शक दीर्घा का शोर रात के अंधेरे में सम्पूर्ण कहलगांव में गूंज उठता था। स्थानीय कलाकारों द्वारा नाटकों की रिहर्सल दो महीने पहले से ही शुरू हो जाती थी, और मुख्य कलाकार का चयन रिहर्सल में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले के आधार पर किया जाता था।

अब आधुनिकता ने इस नाट्य परंपरा को समाप्त कर दिया है। लाखों रुपये खर्च कर अब भव्य पंडाल बनाए जाते हैं। जागरण होता है। जागरण की प्रस्तुति देने इस बार नवमी पूजा के दिन देश के नामी भजन गायकों का जुटान हो रहा है। शुभम भास्कर, सुर संग्राम फेम अर्चना गोस्वामी, दिल्ली की ममता कौर, शिवम राज के भजनों की फुहार में माता रानी के भक्त झूमेंगे। पूजा पंडालों में तुतरु, ढोल, और ढाक की जगह अब तासा पार्टी और डीजे के शोर ने ले ली है।
महाशक्ति पूजा समिति के अरबिंद सिंह, जयप्रकाश सिंह, श्याम प्रसाद मंडल, अनिल पांडे, अखिलेश सिंह, सोनू जायसवाल, मनीष कु सिंह, राजेश भगत कहते हैं इस आधुनिकता के बावजूद पूजा-अर्चना की पद्धति में कोई बदलाव नहीं आया है। आज भी बांग्ला पद्धति से ही पूजा-अर्चना की जाती है। प्रारंभ से ही बली का प्रावधान नहीं था, और आज भी ईख और कोहड़ा की बलि दी जाती है. बंगाल के पंडितों द्वारा ही पूजा कराई जाती है। वर्तमान में पांचवी पीढ़ी के वंशज पार्थ भट्टाचार्य पूजा – अर्चना करा रहे हैं।
फिलहाल, पश्चिम बंगाल के कुशल कारीगरों द्वारा भव्य पंडाल का निर्माण कराया गया है। इस पंडाल का निर्माण शहर के लोकप्रिय मनीष टेंट हाउस और बिजली सज्जा मां गंगा विद्युत डेकोरेटर्स के प्रबंधक पुतुल राम के कारीगरों ने विद्युत बल्ब, ट्यूब लाइट व फुलझड़ियों से पूजा परिसर और मंदिर के आसपास की गलियों को ऐसे सजा दिया है कि आसमान में तारे झिलमिलाते प्रतीत होते हैं। भोर होते ही ध्वनि विस्तारक यंत्र के जरिए या देवी सर्व भूतेषु… जैसे देवी मंत्र पूरे शहर में गूंजने लगते हैं।
















